13 August 2016

उम्र गुज़रेगी इम्तहान में क्या - जॉन एलिया


जॉन एलिया

उम्र गुज़रेगी इम्तहान में क्या?
दाग ही देंगे मुझको दान में क्या?

मेरी हर बात बेअसर ही रही 
नुक्स है कुछ मेरे बयान में क्या?

बोलते क्यो नहीं मेरे अपने 
आबले पड़ गये ज़बान में क्या?

मुझको तो कोई टोकता भी नहीं 
यही होता है खानदान मे क्या?

अपनी महरूमिया छुपाते है 
हम गरीबो की आन-बान में क्या?

वो मिले तो ये पूछना है मुझे 
अब भी हूँ मै तेरी अमान में क्या?

यूँ जो तकता है आसमान को तू
कोई रहता है आसमान में क्या?

है नसीम-ए-बहार गर्दालूद 
खाक उड़ती है उस मकान में क्या

ये मुझे चैन क्यो नहीं पड़ता 
एक ही शख्स था जहान में क्या?

जॉन एलिया

बहरे खफ़ीफ मुसद्दस मख़बून
फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन
2122 1212 22



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काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

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