गीत-नवगीत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
गीत-नवगीत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
गीत - निज को कभी नहीं बहकाना - श्रद्धा पाठक ‘स्वस्ति’
(आधार छंद - अरिल्ल छंद, कुल – संस्कारी, 16 मापनी
का सममात्रिक छंद, चरणान्त - 122/11)
निज को कभी नहीं बहकाना
माया देख नहीं भरमाना
गीत - जब हूक उठे व्याकुल दिल में, और धड़कन रुकती सी लागे - दीपशिखा सागर
जब हूक उठे व्याकुल दिल में, और धड़कन
रुकती सी लागे,
तुम उसी जगह आना मिलने,जिस जगह से बिछड़े थे हम तुम...
गीत - संकेतों में प्रेम - सुविधा पंडित
(दोहा छन्द आधारित गीत)
भास्वर है भ्रू-भंगिमा, भव्य रुचिर रस-रीति
प्रकट करे पल-पल पलक, पुलकित प्रणय-प्रतीति
नवगीत - त्राहि-त्राहि करती है धरती, पौधे हरे लगाओ - डॉ ऋतु अग्रवाल
(सार छन्द आधारित नवगीत )
त्राहि-त्राहि करती है धरती, पौधे हरे लगाओ
मानव जीवन मिट जाएगा,पर्यावरण बचाओ
सदस्यता लें
संदेश (Atom)



















