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ગીત - ભૂમા વશી

 

શબ્દોની પાંખો પહેરીને આભ આંબવા ઉડ્યાં જી..
ચોગમ ઝળહળ ઝળહળ દીઠું
, અજવાળામાં ઉઘડ્યાં જી....

ગીત - કંદર્પ રાવલ 'પ્રયાસ'

 

મને વળગણ સદાય એક તારું
ક્ષણનું યે હોય કોઈને વરસોનું હોય
મારું સગપણ સતત એકધારું....

ગીત : રાજેશ હિંગુ

 

હૈયાનાં ગોંદરેથી ઓચિંતું ઉમટેલું સ્મરણોનું ધણ આજે ભાંભર્યું,
મારાં ગામનું પાદર આજે સાંભર્યું.

बाल गीत - रंग-बिरंगे फूल खिले हैं - डॉ. मधु गुप्ता


 रंग-बिरंगे फूल खिले हैं

हरियाली हँसती आई,

लाल गुलाबी कलियों ने

देखो मस्ती खूब मचाई।

संस्कृत गीत - भूतले स्वर्गभूमिर्विनिर्मिष्यते - डॉ.प्रीतिः पुजारा


(स्रग्विणी छन्दाधारित संस्कृत गीतिका)
 
कोमलानां लतानां  वृथा छेदनं
हे प्रभो यद्दिने रोत्स्यते यत्नतः  |
प्रेङ्खमाणा यदा  वायुसङ्गेन ताः
भूतले स्वर्गभूमिर्विनिर्मिष्यते  ||१|| 

संस्कृत गीत – होली – डॉ नवलता


राजते रङ्गमयी होली।
शोभते रङ्गमयी होली।।

संस्कृत गीत - सघन-घन-घटायते नभः - डॉ कमला पाण्डेय


सखि !श्यामला वसुन्धरा रसायते सघन-घन-घटायते नभः ।

सखि!तडिदसिरिव चपलायते सघन-घन-घटायते नभः।। १।।

संस्कृत गीत – भारतवन्दना – डॉ रेखा शुक्ल

भारतजननि ! भव विजयिनी यशस्विनी।

सन्ततिः भवतु तव सततप्रेमशालिनी ।।01।।

गीत - जिसने बेटे को बाइक दी , बिटिया को मोबाइल - प्रतिभा प्रसाद 'कुमकुम


 जिसने बेटे को बाइक दी , बिटिया को मोबाइल ।
कैसे रह पाय उसके मुख मनभावन स्माइल ।

गीत - आशाओ के दीप जलाकर लिख देंगे हम जीत - सौदामिनी खरे 'दामिनी'


(सरसी छन्द आधारित गीत)

अगली पीढ़ी है संकट में, रहते हैं भयभीत।
आशाओं के दीप जलाकर, लिख देंगे हम जीत।।

छत्तीसगढ़ी गीत – बसन्त - डॉ ममता तिवारी 'मृदुला'


 
पियँर पियँर बगरावत हे,
झुमरत बसंत आवत हे......

गीत - निज को कभी नहीं बहकाना - श्रद्धा पाठक ‘स्वस्ति’

 
 (अरिल्ल छन्द आधारित गीत)

(आधार छंद - अरिल्ल छंद, कुल – संस्कारी, 16 मापनी का सममात्रिक छंद, चरणान्त - 122/11)

 

निज को कभी नहीं बहकाना

माया देख नहीं भरमाना

गीत - जब हूक उठे व्याकुल दिल में, और धड़कन रुकती सी लागे - दीपशिखा सागर


जब हूक उठे व्याकुल दिल में, और धड़कन रुकती सी लागे,

तुम उसी जगह आना मिलने,जिस जगह से बिछड़े थे हम तुम...

गीत - सूझें कहीं न राहें, भ्रम जाल है बिछाता - रश्मि शुक्ल 'किरण'

  

सूझें कहीं न राहें, भ्रम जाल है बिछाता

हो कर घना बहुत ही, ये कोहरा डराता

गीत - संकेतों में प्रेम - सुविधा पंडित

 

(दोहा छन्द आधारित गीत)

भास्वर है भ्रू-भंगिमा, भव्य रुचिर रस-रीति

प्रकट करे पल-पल पलक, पुलकित प्रणय-प्रतीति

गीत - हर बूँद में पीड़ा झरे, इतना विरह मत दीजिए - डॉ माधुरी डड़सेना "मुदिता "

 

हर बूँद में पीड़ा झरे, इतना विरह मत दीजिए

जीवन अधूरी प्यास है, बस प्यार देकर सींचिए

नवगीत - त्राहि-त्राहि करती है धरती, पौधे हरे लगाओ - डॉ ऋतु अग्रवाल


 (सार छन्द आधारित नवगीत )

त्राहि-त्राहि करती है धरती, पौधे हरे लगाओ

मानव जीवन मिट जाएगा,पर्यावरण बचाओ

नवगीत - प्रेम बंधक - सीमा अग्रवाल

 


प्रेम बंधक

फ़रतें आज़ाद ! 

कैसा दौर है यह !

संस्कृत गीति – मधुमासः – डॉ. रेखा शुक्ला

 

विलसति आलि ! मधुरवसन्तः ।
प्रवहति शीतलमन्दसमीरः ॥

संस्कृत गीति – अयि शातनाहतपादपाः – डॉ. नवलता

 


 अयि शातनाहतपादपा विपिनेद्य दूयध्वे कथम्
शाखासु नूतनपल्लवानां हास आगन्ता पुनः