सभी साहित्य रसिकों का सादर अभिवादन
स्वागत है, समस्या पूर्ति मंच द्वारा आयोजित हरिगीतिका छंद पर आधारित पाँचवी समस्या पूर्ति के पहले चरण में। शक्ति का पर्व और श्रीगणेश भी नारी शक्ति द्वारा, इस से सुंदर संयोग कोई और हो भी नहीं सकता था। इस बार सबसे पहले छंद भेजे आ. अजित गुप्ता जी ने, तो शुभारंभ उन्हीं के छंदों के साथ।
'त्यौहार' शब्द पर केन्द्रित छंद मालिका
कल प्रेम का त्योहार था जो, आज सूना गाँव है।
यह क्या हुआ कैसे हुआ है, चुभ रही अब छाँव है।।
यह क्या हुआ कैसे हुआ है, चुभ रही अब छाँव है।।
मैं रोज ही उत्सव मनाती, आज क्यूं यह गौण है।
नवरात्र में उत्साह धीमा, रात क्यूं यह मौन है।१।
हर पर्व मेरा तुम बने थे, दीप सजती रात भी।
फिर दर्द कैसा दे गए तुम, मीत चुभती बात भी।।
फैला अंधेरा घोर पथ पर, मौन सा व्यवहार है।
अब रात गहरी कह रही है, आज भी त्योहार है।२।
कब जल गयी फिर नेह बाती, धुन्ध सारी छट गयी।
इस पर्व पर तुम आ गए तो, पीड़ सारी घट गयी।।
तुम बिन निरर्थक ज़िंदगी, तुम साज हो श्रृंगार हो।
दिन रात हो, ज़ज्बात हो, प्रियतम तुम्ही त्यौहार हो ।३।
इस पर्व पर तुम आ गए तो, पीड़ सारी घट गयी।।
तुम बिन निरर्थक ज़िंदगी, तुम साज हो श्रृंगार हो।
दिन रात हो, ज़ज्बात हो, प्रियतम तुम्ही त्यौहार हो ।३।
'कसौटी' शब्द पर केन्द्रित छंद मालिका
हर तार छू लो तुम दिलों के, क्या दिखावा बात का।
ममता लुटाओ जगत में यह नेम हो दिन रात का।।
ममता लुटाओ जगत में यह नेम हो दिन रात का।।
कब तुम परीक्षा में फंसोंगे, क्या ठिकाना मात का।
जिनके ह्रदय में प्रेम हो उन को न डर कुछ घात का।१।
जिनके ह्रदय में प्रेम हो उन को न डर कुछ घात का।१।
दो देह पर इक प्राण हो, तो है कसौटी मीत की।
दिल साज, सरगम भावना, तो है कसौटी प्रीत की।।
निश्छल ह्रदय में नेह हो, तो है कसौटी रीत की।
सुन कर जिसे दिल झूम उट्ठे वह कसौटी गीत की।२।
दिल साज, सरगम भावना, तो है कसौटी प्रीत की।।
निश्छल ह्रदय में नेह हो, तो है कसौटी रीत की।
सुन कर जिसे दिल झूम उट्ठे वह कसौटी गीत की।२।
आज के दौर मैं जब कोई व्यक्ति छंदों पर लग के, खट के काम करने को तैयार हो जाता है, तो हमारे हृदय में उस के लिए सम्मान और भी बढ़ जाता है। अजित दीदी और उन जैसे वे सभी रचनाधर्मी, जो इस साहित्य सेवा हेतु छन्द रचना में जी जान से खटे हुए हैं, सम्मान के पूरे-पूरे हक़दार हैं। अजित दीदी के छंदों की गेयता और भाव चयन को देख कर सहसा ही 'कुछ तो हम भी करें' वाला भाव उत्पन्न हो जाता है। अजित दीदी को बहुत बहुत बधाई।
छंद आने शुरू हो गए हैं, और साथ ही साथ उन पर काम भी शुरू हो चुका है। क्या क्या विषय और क्या क्या भाव संकलन हैं, पढियेगा तब जानिएगा सर जी| मंच अपने उद्देश्य "सब के साथ मिल कर, रचनात्मक मार्ग पर चलते हुये, भारतीय छंद साहित्य के प्रति लोगों में फिर से रुझान उत्पन्न करना" की तरफ अग्रसर है, और यह हम सब के लिए खुशी का सबब है।
आप सभी अजित दीदी के छंदों पर प्रशंसा रूपी पुष्पों की बरसात करें, तब तक हम तैयारी करते हैं अगली पोस्ट की। 'अन्य बातें समान रहने पर' अगली पोस्ट में हम एक और परिचित के छन्द पहली बार पढ़ेंगे इस मंच पर।
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विशेष सूचना
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इस हरिगीतिका छंद वाली समस्या पूर्ति के समापन के उपरान्त, चौपाई छंद वाली पहली स. पू. से ले कर हरिगीतिका छंद वाली पांचवी स. पू. तक के सभी छंदों को 'ई-क़िताब' की श़क्ल में प्रकाशित करने का प्लान है। इस विषय में अपने विचार, यदि कोई हों, तो व्यक्त करने की कृपा करें।
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जय माँ शारदे!

