चकवा चकवी दो जने इन मत मारो कोय।
ये मारे करतार के रैन बिछोया होय।।
नदी किनारे मैं खड़ी, पानी झिलमिल होय।
पी गोरे मैं साँवरी, किस बिधि मिलना होय।।
खुसरो रैन सुहाग की, जागी पी के संग।
तन मेरो मन पीय को, दोउ भए इक रंग॥
ये मारे करतार के रैन बिछोया होय।।
नदी किनारे मैं खड़ी, पानी झिलमिल होय।
पी गोरे मैं साँवरी, किस बिधि मिलना होय।।
खुसरो रैन सुहाग की, जागी पी के संग।
तन मेरो मन पीय को, दोउ भए इक रंग॥