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| कविता गुप्ता |
शब्द की सामर्थ्य का विलक्षण उदाहरण बक़ौल कविता गुप्ता :-
चार-छह साल की दो नन्ही-नन्ही बेटियों को अपने से उस वक़्त दूर करना जब उन्हें माँ की सख़्त ज़ुरूरत होती है; किसी भी माँ के लिये बहुत मुश्किल समय होता है। परन्तु जीवन है ही ऐसा जो कि मज़बूरियों के बग़ैर चल ही नहीं सकता। उसी वक़्त की यह ख़तनुमा कविता है। तब मैंने इसे अपनी बच्चियों को यह सोच कर नहीं भेजा कि उन का बाल-सुलभ कोमल हृदय टूट
