01.03.2026 (महिला विशेषांक भाग 2)

नमस्कार,

रंगों के महापर्व होली एवं भारतीय नववर्ष सहित मार्च 2026 में पड़ने वाले सभी पर्वों की अनेकानेक शुभकामनाएँ. पिछले महीने के अद्यतन यानि महिला विशेषांक (भाग 1) को मिले प्रतिसाद के लिए आप सभी का ह्रदय से आभार.

अतिथि सम्पादकीय - अर्चना वर्मा सिंह

इस माह की 8 तारीख को महिला दिवस मनाया जाता है इसलिए  इस माह का अद्यतन भी महिला विशेषांक रूप में ही है.

एक हाइकु - बुशरा तबस्सुम


 शून्य आकाश
तरंगित मनस
प्रतीति खास

आलेख - ये अंग्रेजी स्कूलों की हिंदी - ममता श्रवण अग्रवाल

मित्रों, हो सकता है आप में से कोई अंग्रेजी स्कूल में हिंदी के शिक्षक हों और आपको ये बात न अच्छी लगे इसीलिए लिए मैं अग्रिम क्षमा चाहती हूँ. 

आलेख - नदी और नारी की समानता – सुनीता चौधरी

नदी और नारी
दोनों ही सृष्टि की जीवनदायिनी धारा हैं। दोनों का अस्तित्व मानव समाज और प्रकृति के लिए अपरिहार्य है।

कविता - कभी ऐसे भी सोचना - प्रज्ञा मिश्र ‘पद्मजा’

 

कभी-कभी प्रश्न उठाए नहीं जाते

भीतर कहीं खटकने लगते हैं

सही समय पर बात न हो

तो सम्बन्ध चटकने कहते हैं

कविता - अंहकार क्या है - डॉ. शबनम आलम


अपने आप को सबसे अलग मानना

अंहकार है

या, खुद को सर्वश्रेष्ठ समझना

अंहकार है

सहजता या सरलता का अभाव

अंहकार है

कविता – दोराहा - पूनम सुयाल


मेरे जीवन में भी
एक समय ऐसा आया
जब सब कुछ
चलता हुआ
अचानक ठहर गया।
बाहर की दुनिया

सोरठा छंद - विनीता निर्झर

चादर उतनी तान
, जितनी वह फैले सहज।

जीवन का यह ज्ञान, झोली में भरले अभी।।

पिरामिड - डॉ इन्दु मिश्र मंडला

 

लो🌹

हुआ 🌹

उदित 🌹

नव सूर्य 🌹

लालिमा फैली🌹

नव आस जगी 🌹

सूरज सा उगना🌹

पंख पसार उड़ो🌹

मत घबराना 🌹

आगे बढ़ना 🌹

सदा रोज🌹

सीखना 🌹

यही 🌹

है 🌹

🌷

होली के माहिये – अर्चना वर्मा सिंह


साजन मत छेड़ो जी,

जाने दो मुझको,

हठ अब तुम छोड़ो जी।

निरूप घनाक्षरी छन्द - अनीता सिंह तोमर 'अनी

 

रास हो मन भावन, प्यारी है ऋतु सावन
कृष्ण संग नाच रहीं, प्यारी राधा रानी।

छवि लगती है न्यारी, रास रचते बिहारी
मोहित हैं गोपी सारी, कान्हा की दीवानी।

अमृत ध्वनि छंद - योगमाया शर्मा


बंधन अनुपम प्रेम का, गूॅंजे प्रेमिल गीत।

भाव प्रणय मन डूबता, कैसी जग की रीत।।

कैसी जग कीरीत विलग कीअजब बनाई।

मनवा तरसें, अँखियाँ बरसें, प्रीत लगाई।।

बैरी साजनसूना सावन, अंतस क्रंदन।

मेल विरह के, भ्रमर उलझताअनुपम बंधन।।

 


 

कुंडलियां छंद - डॉ ऋतु अग्रवाल


कुहरे की चादर हटी
, हुआ दिवाकर पुष्ट।

मौसम ने परवान चढ़, किया धरा को तुष्ट।।

किया धरा को तुष्ट, फूलती सरसों पीली।

विहग रहे हैं झूम, देख नभ आभा नीली।।

पुष्पों से 'ऋतु' प्रेम, जताने आए भँवरे।

तनिक ठहर जा दुष्ट, कहाँ जाता है कुहरे।।

राधेश्यामी छंद - विनीता निर्झर


नदिया का जल शुभ्र रजत सा
,

कल-कल करता बहता जाए।

जीवन में गति रहे निरन्तर,

सबको यह संदेश सुनाए।।

चौपाई छंद - श्रद्धा पाठक 'स्वस्ति'

 

कोरे - कोरे क्यों बनवारी ।

ढूँढे आज गोपियाँ सारी।।

कहाँ छुपे हो कान्हा छलिया।

रंग साँवरा ले साँवलिया।।

दोहे - प्रतिभा प्रसाद 'कुमकुम


 गुरू शिष्य व परंपरा , गहन रखें संबंध ।

जंबुद्वीप में आज भी , प्रेम सुधा अनुबंध ।।

 

संस्कृति में संस्कार हो , शिक्षा जग में पूर्ण ।

नई कोंपलें जब खिलें , मधुरसता का चूर्ण ।। 

दोहे - डॉ रानी तँवर


 दधि माखन नित लूटि कै, देवे मटकी फोर।

बाँधै ऊखल सौं कसे, जसुदा माखन चोर।।

 

नरम देह कनु की भई, रसरी गरि कै लाल।

अँखियन तें अँसुवा झरैं, गरम हु’इ गवा भाल।।

राजस्थानी लघुकथा - पर्दो अर गहना - डॉ रानी तँवर

गाँव में ढोल-नगारा बज्या, गली-गली में हुंकार उठी— "जमींदार री बहू आवे है, देखो देखो…!"

 

सोने-चाँदी री झंँकार, गहना-गठ्ठा, लाल-पीळा जोड़ाबींदणी असी सजली लागी जणों कोई देवी मूर्त्ति हो।

संस्मरण - रवि रश्मि 'अनुभूति'

कुछ संस्मरण ऐसे होते हैं, जो खुशियाँ दे जाते हैं, और कुछ याद आते ही दुख देते हैं। ऐसा ही दुखद संस्मरण है यह। 

कहानी - रोते हुए मेरे गाँव - अरुणा अभय शर्मा

विद्यालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू हो गए थे। मैथिली पिछले पाँच वर्ष से एक निजी विद्यालय में नौकरी कर रही थी। रघुवीर भी मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर है। 

बाल गीत - रंग-बिरंगे फूल खिले हैं - डॉ. मधु गुप्ता


 रंग-बिरंगे फूल खिले हैं

हरियाली हँसती आई,

लाल गुलाबी कलियों ने

देखो मस्ती खूब मचाई।

संस्कृत गीत - भूतले स्वर्गभूमिर्विनिर्मिष्यते - डॉ.प्रीतिः पुजारा


(स्रग्विणी छन्दाधारित संस्कृत गीतिका)
 
कोमलानां लतानां  वृथा छेदनं
हे प्रभो यद्दिने रोत्स्यते यत्नतः  |
प्रेङ्खमाणा यदा  वायुसङ्गेन ताः
भूतले स्वर्गभूमिर्विनिर्मिष्यते  |||| 

संस्कृत गीत – होली – डॉ नवलता


राजते रङ्गमयी होली।
शोभते रङ्गमयी होली।।

संस्कृत गीत - सघन-घन-घटायते नभः - डॉ कमला पाण्डेय


सखि !श्यामला वसुन्धरा रसायते सघन-घन-घटायते नभः ।

सखि!तडिदसिरिव चपलायते सघन-घन-घटायते नभः।। १।।

संस्कृत गीत – भारतवन्दना – डॉ रेखा शुक्ल

भारतजननि ! भव विजयिनी यशस्विनी।

सन्ततिः भवतु तव सततप्रेमशालिनी ।।01।।

गीत - जिसने बेटे को बाइक दी , बिटिया को मोबाइल - प्रतिभा प्रसाद 'कुमकुम


 जिसने बेटे को बाइक दी , बिटिया को मोबाइल ।
कैसे रह पाय उसके मुख मनभावन स्माइल ।

गीत - आशाओ के दीप जलाकर लिख देंगे हम जीत - सौदामिनी खरे 'दामिनी'


(सरसी छन्द आधारित गीत)

अगली पीढ़ी है संकट में, रहते हैं भयभीत।
आशाओं के दीप जलाकर, लिख देंगे हम जीत।।

छत्तीसगढ़ी गीत – बसन्त - डॉ ममता तिवारी 'मृदुला'


 
पियँर पियँर बगरावत हे,
झुमरत बसंत आवत हे......

ब्रजगजल - चार पैसा पाय कें बिन बात के बुकलात है - पूनम शर्मा पूर्णिमा

 

चार पैसा पाय कें बिन बात के बुकलात है

च्यों करै गिल्ला-गुजरजम आइ कें लै जात है

 

जे भलौ आयौ जमानोंनैन नीचै है रहे

प्हैर कें फाटे घुटन्नाना कोई सकुचात है

हिन्दीगजल - प्रेम की भावना रखो मन में – डॉ आरती कुमारी


 प्रेम की भावना रखो मन में

फूल खिलते हैं जैसे उपवन में

 

राम जैसे न बन सको लेकिन

तुम लगाओ न ध्यान रावन में

ગુજરાતી ગઝલ - શબદ નામે સાથી, શબદ છે સહારો - શબનમ ખોજા


શબદ નામે સાથી
, શબદ છે સહારો

લખ્યો એની નિશ્રામાં મારો ગુજારો.

 

મને મારી ભીતર મળ્યો એકતારો

કોઈ આવી, મારી નજર તો ઉતારો!

ગુજરાતી ગઝલ - ધૈર્ય મારું જોઈ શરમાઈ જશે - અંજના ભાવસાર ‘અંજુ’


ધૈર્ય
મારું જોઈ શરમાઈ જશે;

તારી 'ના' 'ના'.. 'હા'માં બદલાઈ જશે!

 

તારી પાંપણ ઢાળીને તું રાખજે,

જૂઠ તારું નહિ તો પકડાઈ જશે.

मराठी गझल - प्रवाहाचे नियम विसरायचे आता – निर्मिती कोलते


 प्रवाहाचे नियम विसरायचे आता

दिवे पाण्यामधे सोडायचे आता

 

उशाला स्वप्न जर झोपून गेले तर

कशाला रात्रभर जागायचे आता

भोजपुरी गजल - नैन में, नेह के कमी बाटे – वीणा सिन्हा


 नैन में, नेह के कमी बाटे ।
अइसने, अब त आदमी बाटे ।

आपने लोग अब दगा देता,
एहि से आँख में नमी बाटे ।

ग़ज़ल - मैं दर्दो अज़ीयत की तलबगार नहीं हूँ - सपना एहसास


  मैं दर्दो अज़ीयत की तलबगार नहीं हूँ

सो जिन्स-ए-महब्बत की ख़रीदार नहीं हूँ

 

ख़ुद अपने ही हाथों से किया तर्के-त’अल्लुक़

अब छोड़ दिया उसको तो नादार नहीं हूँ 

कार्यक्रम समाचार - ‘बतरस’ में व्यक्त हुए प्रेम के विविध रूप - डॉक्टर मधुबाला शुक्ल

शरत् ऋतु के मदनोत्सव और ‘वेलेंटाइन डे’ दोनो के उपलक्ष्य में ‘बतरस’ ने फ़रवरी महीने में ‘है प्रेम जगत में सार’ कार्यक्रम आयोजित किया
, जिसमें मुम्बई के गोरेगाँव उपनगर में स्थित ‘केशव गोरे स्मारक भवन’ की छत विविधरूपी प्रेम-चर्चा से गुंजायमान हो उठी।