दो ही पल के दर्द में..हम हो गये निढाल
तू कैसे हँसता रहा..दुख में सालों-साल
तू कैसे हँसता रहा..दुख में सालों-साल
जब विपदा की रैन में..छोड़ गये सब साथ
मुझको सहलाते रहे..जाने किसके हाथ
मुझको सहलाते रहे..जाने किसके हाथ
चादर से बाहर हुए..जब से अपने पाँव
कंधों-कंधों धूप है..घुटनों-घुटनों छाँव
कंधों-कंधों धूप है..घुटनों-घुटनों छाँव
कवि बनकर हासिल हुए..यश दौलत सत्कार
एक तीर से कर लिये..हमने तीन शिकार
एक तीर से कर लिये..हमने तीन शिकार