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है आज की नारी निपुण हर कार्य में वह दक्ष है

सभी साहित्य रसिकों का सादर अभिवादन


आदरणीया साधना वैद जी ने हरिगीतिका छंद पर परिचर्चा शुरू होते ही कलम आजमाइश शुरू कर दी थी। उस का सुपरिणाम आज हमारे सब के सामने है। साधना दीदी इस मंच पर पहली बार प्रस्तुति दे रही हैं, और हम आशा करते हैं कि न सिर्फ वे स्वयं भविष्य में भी मंच से जुडी रहेंगी; बल्कि अपने और साथियों को भी इस साहित्य सेवा में जोड़ने का हर संभव प्रयास करेंगी।


 




'कसौटी'

सोचा अगर उसको ‘कसौटी’ - पर परखने का कभी।
भारी पड़ेगी वह सभी पर, बात सुन लीजे सभी।।

है आज की नारी निपुण, हर - कार्य में वह दक्ष है।
'वह है बनी घर के लिये' - यह - 'सोच का इक पक्ष' है।१।


हो चाँद सूरज की चमक, नित - क्षीण, जिसकी आब से।
यह विश्व आलोकित सदा, उस - की चमक नायाब से।।

वह है सदय, कोमल, करुण, 'जग - हित प्रयासों' के लिये।
पर चण्डिका भी है, 'मनुज के -शत्रु असुरों' के लिये।२।


[यही होती है कवि की कल्पना, आप खुद देखिये, 'कसौटी' शब्द को कहाँ जोड़ा है साधना दीदी ने]


'अनुरोध'

है आज यह ‘अनुरोध’ मेरा, हृदय अपने धारिये।
दुःख-दर्द जीवन अंग हैं, इन - को सहज स्वीकारिये।।

नफरत, जलन, अलगाव, हिंसा, द्वेष क्षण में छोड़िए।
चलिये सदा सन्मार्ग पर मन की दिशा को मोड़िये।१।


जो छांटना ही है, विकारों - का अँधेरा छांटिए।
पर, धर्म-जाती-धनी-निर्धन - हित, न खुद को बाँटिये।।

है ‘साधना’ यह कर रही कर - जोर विनती जानिये।
कर लीजिए निर्मल हृदय, ‘अनुरोध’ मेरा मानिये।२।

[सही कहा दीदी, ह्रदय निर्मल हो जाए तो सारे झंझट ही मिट जायेंगे]


'त्यौहार'

आते सुखद ‘त्यौहार’, जीवन - को सजाने के लिये।
मत चूकिए अवसर ज़रा भी, दिल मिलाने के लिये।।

विस्तीर्ण हो सदभावना, अति - श्रेष्ठ है पथ प्यार का।
अवसाद मुक्त रहें सभी, यह - नियम हो संसार का।१।


हिल मिल सभी के सँग मनायें, ‘पर्व’ ये उत्साह से।
हों प्राण प्रमुदित सहज ही, औ - भर उठें उल्लास से।।

सब देव देवी हों सदय, इस - विश्व का उत्थान हो।
हों कामना पूरी सभी, माँ! बस यही वरदान दो।२।

[त्यौहार का तात्पर्य सार्थक रूप से विवेचित किया आपने]




सच ही तो कहते हैं:- "जब जब भागीरथ चाहे गंगा को आना पड़ता है। नाहासिल-नामुमकिन क्या है? एक बार जो ठान लिया।।"   वास्तव में इंसान चाहे तो क्या नहीं कर सकता? मन में धार ले तो इंसान कुछ भी कर सकता है। अजित दीदी और अब साधना दीदी ने इसे साबित कर दिखाया है। आप इन छंदों का रसास्वादन करें, अपने प्रशंसा रूपी पुष्पों की वर्षा करें और हम एज यूज्यूअल नयी पोस्ट की तैयारी करते हैं।





जय माँ शारदे!