
चले आओ किसी का डर नहीं है|
ये मेरा है तुम्हारा घर नहीं है|1|
पहुँच ही जाएगी कानों में तेरे|
मेरी आवाज अब बे-पर नहीं है|2|
यहाँ सब काम लेते हैं नजर से |
किसी के हाथ में खंजर नहीं है|3|
हुए हैं रहनुमा राहों के पत्थर |
मुझे अब ठोकरों का डर नहीं है|4|
हैं चेहरे पर यहाँ चेहरे हजारों |
हया आँखों में रत्ती भर नहीं है |5|
:- सुनील टाँकSuniltaank8@gmail.com