जो दिल से गुजरती है पुरवाई महकती है
इस प्यार की ख़ुशबू से अँगनाई महकती है
उस फूल से चेहरे को एक बार ही देखा था
और आज तलक मेरी बीनाई महकती है
बीनाई – दृष्टि
मेंहदी लगे हाथों की दालान में ख़ुशबू है
खेतों की मुँडेरों पर शहनाई महकती है
घर वालों से छुप-छुप कर मिलते थे जहाँ हम-तुम
उस गाँव की सरहद की अमराई महकती है
मज़दूरों का जज़्बा भी था शाहजहाँ जैसा
पत्थर में मुहब्बत की सच्चाई महकती है
कल रात ‘हसन’ मेरे ख़्वाबों में वो आया
था
अब तक मेरे कमरे की तनहाई महकती है
:- हसन फतेहपुरी
बहरे हज़ज मुसम्मन अख़रब मक़्फूफ़ मक़्फूफ़
मुख़न्नक सालिम
मफ़ऊलु मुफ़ाईलुन मफ़ऊलु मुफ़ाईलुन
221 1222 221 1222