13 August 2016

अब तो बेसुध रहता हूं - नरहरि अमरोहवी

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नरहरि अमरोहवी


अब तो बेसुध रहता हूं
अपनों के ग़म सहता हूं
अब फूलों के पौधौं से
गुज़री बातें कहता हूं
कच्ची दीवारों जैसा
मैं भी पल पल ढहता हूं
यादों का इक दरिया है
जिसमें अक्सर बहता हूं
तनहा भीगी आंखों से
खुद से सब कुछ कहता हूं

नरहरि अमरोहवी


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काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

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