6 December 2013

दर्द के हाथों में परचम आ गया - नवीन

दर्द के हाथों में परचम आ गया
बात में लहजा मुलायम आ गया

क्या करिश्मे हो रहे हैं आज कल
आप को आवाज़ दी, ग़म आ गया

हम ने समझा प्यार बरसायेगा प्यार
अश्क़ बरसाने का मौसम आ गया

चार दिन तक ही रही दिल में बहार
फिर उजड़ जाने का मौसम आ गया

आज नज़राने की थी उस से उमीद
भर के वो आँखों में शबनम आ गया

चल, नई धुन छेड़ कर आलाप लें
ज़िन्दगी की ताल में सम आ गया

शाम को तो तैश मत खाएँ 'नवीन'
सूर्य भी पूरब से पच्छम आ गया

:- नवीन सी. चतुर्वेदी

3 comments:

  1. बढ़िया,बेहतरीन गजल ...!
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    Recent post -: वोट से पहले .

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  2. आज नज़राने की थी उस से उमीद
    भर के वो आँखों में शबनम आ गया ...

    नवीन भई हर शेर लाजवाब नजराने की तरह है पढ़ने वालों के लिए ... कमाल की सादगी लिए उम्दा गज़ल ...

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