30 December 2013

बजारन में दिखबे लगे चन्द्रमा - नवीन

बजारन में दिखबे लगे चन्द्रमा
सितारे ऊ बनिबे लगे चन्द्रमा

ह्रिदे में हुलसिबे लगे चन्द्रमा
अटारिन पे चढिबे लगे चन्द्रमा

समझ ल्यो नई रौसनी मिल गई
किताबन कूँ पढ़िबे लगे चन्द्रमा

पढ़्यौ जब सूँ दुस्यंत-साकुन्तलम
फरिस्तन सूँ डरिबे लगे चन्द्रमा

खुदइ तन सूँ बदरन कूँ लिपटाय कें
अँधेरेन सूँ मिलबे लगे चन्द्रमा

: नवीन सी. चतुर्वेदी

बहरे मुतक़ारिब मुसम्मन मक़्सूर
फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़उल

122 122 122 12

बाज़ारों में दिखने लगे चन्द्रमा
सितारे भी बनने लगे चन्द्रमा

हृदय में हुलसने [ख़ुश होना] लगे चन्द्रमा
अटारिन [अटारियों] पे चढ़ने लगे चन्द्रमा

समझ लो नयी रौशनी मिल गई
किताबात पढ़ने लगे चन्द्रमा

पढ़ा जब से दुष्यन्त-शाकुंतलम
फ़रिश्तों से डरने लगे चन्द्रमा

ख़ुद ई तन से अब्रों को लिपटाय के
अँधेरों से मिलने लगे चन्द्रमा

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काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

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