29 December 2013

हसरतें सुनता है और हुक़्म बजा लाता है - नवीन

हसरतें सुनता है और हुक़्म बजा लाता है
बस मेरा दिल ही मेरी बात समझ पाता है

इतनी सी बात ने खा डाले है लाखों जंगल
किसे अल्ला' किसे भगवान कहा जाता है

आज भी काफ़ी ख़ज़ाना है ज़मीं के नीचे
आदमी है कि परेशान हुआ जाता है

अच्छे अच्छों पे बकाया है किराया-ए-सराय
जो भी आता है, ठहरता है, गुजर जाता है

कुछ न कुछ भूल तो हम से भी हुई होगी 'नवीन'
चाँद-सूरज पे गहन यूँ ही नहीं आता है

:- नवीन सी. चतुर्वेदी

बहरे रमल मुसम्मन मख़बून महज़ूफ़
फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फ़ेलुन
2122 1122 1122 22

2 comments:

  1. अच्छे अच्छों पे बकाया है किराया-ए-सराय
    जो भी आता है, ठहरता है, गुजर जाता है
    बहुत उम्दा अशआर !
    नई पोस्ट मिशन मून
    नई पोस्ट ईशु का जन्म !

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