4 September 2012

हज़ारों साल मैं सोता रहा क्या - नवीन

Youtube Link - https://www.youtube.com/watch?v=SMfEK76YSdc 

हवा के साथ उड़ कर भी मिला क्या
किसी तिनके से आलम सर हुआ क्या

मेरे दिल में ठहरना चाहते हो
ज़रा फिर से कहो – तुमने कहा क्या

डरा-धमका के बदलोगे ज़माना
अमाँ! तुमने धतूरा खा लिया क्या

उन्हें लगता है बाकी सब ग़लत हैं
वो खेमा साम्प्रदायिक हो गया क्या

बदल सकते नहीं पल में अनासिर
हज़ारों साल मैं सोता रहा क्या

अँधेरे यूँ ही तो घिरते नहीं हैं
उजालों ने किनारा कर लिया क्या

बड़े उम्दा क़सीदे पढ़ रहे हो
वजीफ़े में इजाफ़ा हो गया क्या

क़दम रहते नहीं उस के ज़मीं पर
वो पैदा भी हुआ उड़ता हुआ क्या

झगड़ता है कोई यूँ अजनबी से
उसे मुझ में कोई अपना दिखा क्या

तुम्हारे वासते कुछ भी किया नईं
तुम्हारे वासते करना था क्या-क्या

फ़लक पर थोड़ा सा हक़ है मेरा भी
परिंदों को ही उड़ते देखता क्या
नवीन सी. चतुर्वेदी


बहरे हजज मुसद्दस महजूफ़
मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन
1222 1222 122

11 comments:

  1. बहुत खूब...
    लाजवाब गज़ल...

    सादर
    अनु

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  2. क़दम रहते नहीं उस के ज़मीं पर
    वो पैदा भी हुआ उड़ता हुआ क्या

    बहुत खूब..

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  3. अँधेरे यूँ ही तो घिरते नहीं हैं
    उजालों ने किनारा कर लिया क्या

    बहुत उम्दा गज़ल

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  4. बदल सकते नहीं पल में अनासिर
    हज़ारों साल मैं सोता रहा क्या... behad badhiya

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  5. वाह ! बहुत खूब, बहुत सुन्दर :-)

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  6. फ़लक पर थोड़ा सा हक़ है मेरा भी
    परिंदों को ही उड़ते देखता क्या

    बहुत सुन्दर ग़ज़ल

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  7. बहुत बढ़िया
    शानदार गजल....
    :-)

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  8. आज 09/09/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  9. फ़लक पर थोड़ा सा हक़ है मेरा भी
    परिंदों को ही उड़ते देखता क्या

    बहुत खूब !!

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