21 July 2013

कुछ तो दामनकशाँ हूँ मैं उससे - मयंक अवस्थी


जो मेरी रोशनी है ज़ाती है
दिल दिया है , उमीद बाती है
ज़ाती – व्यक्तिगत / अपनी स्वयं की


मैं वो पत्थर हूँ जिस में मुद्दत से
साँस आती है - साँस जाती है

कुछ तो दामनकशाँ हूँ मैं उससे
और कुछ ज़िन्दगी लजाती है
दामनकशाँ - दामन बचाने वाला
 
एक घुड़की जो दी हवाओं ने
लौ चराग़ों की थरथराती है

चीथड़ा हो गई कोई इस्मत
इश्तिहारों के काम आती है
इस्मत – अस्मत / स्त्री के पतिव्रत के सन्दर्भ में

सर पे चढती है धूल पाँओं की
जब हवा हौसला बढाती है

इतनी राहें मुझे बुलाती हैं
जुस्तजू राह भूल जाती है
जुस्तजू – तलाश / खोज की इच्छा / quest

मेरी तदबीर आखिरश थक कर
पाँव तक़दीर के दबाती है
तदबीर – कोशिश / प्रयास

ज़िन्दगी तेरी क़त्लगाहों में
मौत अब लोरियाँ सुनाती है
क़त्लगाह – वह स्थान जहाँ वध किया जाता है / वध-स्थल

मयंक अवस्थी
रिजर्व बैंक वरिष्ठ अधिकारी, [सम्प्रति - कानपुर]
[08765213905]

बहरे खफ़ीफ मुसद्दस मखबून
फ़ाएलातुन मुफ़ाएलुन फ़ालुन 
2122 1212 22

6 comments:

  1. चीथड़ा हो गई कोई इस्मत
    ‘इश्तिहारों के काम आती है ...

    बहुत ही खूबसूरत शेर इस गज़ल का ... वैसे तो हर शेर कमाल है ... क्या कहने मयंक साहब के ... शुक्रिया नवीन जी ...

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  2. क्या बात है .........वाह वाह ...बहोत खुब वाह वाह

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  3. Mayank bhaiya kya kahne
    मैं वो पत्थर हूँ जिस में मुद्दत से
    साँस आती है - साँस जाती है
    Laajawaab
    Or e 2 babbarsher
    सर पे चढती है धूल पाँओं की
    जब हवा हौसला बढाती है

    इतनी राहें मुझे बुलाती हैं
    जुस्तजू राह भूल जाती है

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  4. मैं वो पत्थर हूँ जिस में मुद्दत से
    साँस आती है - साँस जाती है

    चीथड़ा हो गई कोई इस्मत
    ‘इश्तिहारों के काम आती है ‘

    इतनी राहें मुझे बुलाती हैं
    जुस्तजू राह भूल जाती है

    उफ्फ्फ किन लफ़्ज़ों में तारीफ़ करें इस खूबसूरत ग़ज़ल की ? मयंक जी ने ग़ज़ल लेखन को बुलंदियों पे पहुँचाने में बहुत योगदान दिया है . उन की हर ग़ज़ल पढ़ कर दिल से दाद और दुआ दोनों निकलती है. वो जितने बड़े शायर हैं उतने ही अच्छे इंसान भी , उनसे बहुत कुछ सीखा है और अभी तक सीख रहा हूँ. इस एक और बेहतरीन ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई मयंक जी .

    नीरज

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  5. USTAAD ki ghazal ko yaha padh kar dil khush ho gaya....har ik she'r bahut khoobsurat aur lajawab..

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