1 June 2013

हमारे घर से समन्दर दिखाई देता है - सुनील आफ़ताब

हरेक डूबता मंज़र दिखाई देता है
हमारे घर से समन्दर दिखाई देता है

मैं जिस के साये से बच कर निकलना चाहता हूँ
वो मुझको राह में अक्सर दिखाई देता है 

उसे कभी भी न इस बात की ख़बर हो पाये
वो अपने आप से बेहतर दिखाई देता है 

हमारे बीच ये नज़दीकियाँ ही काफ़ी हैं
तुम्हारे घर से मेरा घर दिखाई देता है 

बहरे मुजतस मुसमन मखबून महजूफ
मुफ़ाएलुन फ़एलातुन मुफ़ाएलुन फालुन
1212 1122 1212 22

1 comment:

यहाँ प्रकाशित सभी सामग्री के सभी अधिकार / दायित्व तत्सम्बन्धित लेखकाधीन हैं| अव्यावसायिक प्रयोग के लिए स-सन्दर्भ लेखक के नाम का उल्लेख अवश्य करें| व्यावसायिक प्रयोग के लिए पूर्व लिखित अनुमति आवश्यक है|

साहित्यम पर अधिकान्शत: छवियाँ साभार गूगल से ली जाती हैं। अच्छा-साहित्य अधिकतम व्यक्तियों तक पहुँचाने के प्रयास के अन्तर्गत विविध सामग्रियाँ पुस्तकों, अनतर्जाल या अन्य व्यक्तियों / माध्यमों से सङ्ग्रहित की जाती हैं। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री पर यदि किसी को किसी भी तरह की आपत्ति हो तो अपनी मंशा विधिवत सम्पादक तक पहुँचाने की कृपा करें। हमारा ध्येय या मन्तव्य किसी को नुकसान पहुँचाना नहीं है।

My Bread and Butter