13 June 2012

एकता अधार राष्ट्र-भाषा एक भारती - यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम'



फल की सफलता में मूल ही अधार होत
मूल कौ अधार बीज, बीज धरा धारती

धरा उरबरा हेतु नीर है अधार सार
नीर की अधार, नभ - घटा वारि ढारती

'प्रीतम' विवेक, ता की - बुद्धि त्यों अधार रही
बुद्धि की अधार सिच्छा - नेकता उभारती

नेकता अधार प्यार, एकता की माल गुहै
एकता अधार राष्ट्र - भाषा एक भारती 


:- यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम'

11 comments:

  1. वाह..
    बहुत सुन्दर रचना....
    एक बार पढ़ा तो लगा कुछ समझीं नहीं...फिर पढ़ा तो आनंद आया.....

    सादर

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  2. वाह,,,,
    बहुत सुंदर प्रस्तुति,,,बेहतरीन रचना,,,,,

    MY RECENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: विचार,,,,

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  3. समझने के लिए दो-तीन बार पढ़ना पड़ा..
    समझ में आई तो बहुत अच्छी लगी ...
    घनाक्षरी की बेहतरीन रचना !!...आभार!

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  4. आपकी पोस्ट कल 14/6/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा - 902 :चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  5. बहुत सार्थक प्रस्तुति!
    मगर यह तख़्ती तो हमने ही बनाई थी।
    आपने इसका उपयोग किया बहुत अच्छा लगा।

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  6. वाह! बहुत ही बढ़िया धनाक्षरी....
    सादर आभार.

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