27 July 2013

इस जिस्म के अन्दर है बयाबाँ भी चमन भी - नवीन

वहशत है ज़माने की तो है तेरी लगन भी
इस जिस्म के अन्दर है बयाबाँ भी चमन भी
वहशत - डर / पागलपनबयाबान - जंगलसुनसान जगह

फिर मींच के पलकों को ज़रा ख़ुद में उतरना
गर तुझको सुकूँ दे न सकें 'नात-भजनभी
नात - इस्लाम में ईश्वरीय आराधना यानि भजन के लिये प्रयुक्त

ऐसा नहीं बस धरती पे ही रंज़ोअलम हैं
हर सुब्ह सिसकता है ज़रा देर गगन भी
रंज़ोअलम - दुःख-दर्द

दिल तोड़ने वाले कभी ख़ुश रह नहीं सकते
ता-उम्र तड़पते रहे बृजराज किशन भी ***

ताला सा लगा देती हैं कुछ बातें ज़ुबाँ पर

समझा न सके साहिबो सीता को लखन भी @@@


@@@ वनवास के दौरान सोने के हिरण के आखेट पर राम जाते हैं और काफ़ी देर तक लौटते नहीं हैं। तब जानकी लक्ष्मण से कहती हैं कि वह जा कर भाई की ख़ैर-ख़बर ले कर आयें। अनिष्ट की आशंका को भाँपते हुये लक्ष्मण अपनी भाभी को समझाने का प्रयत्न करते हैं, पर नारी स्वभाव के अनुसार सीता उन्हें अत्यधिक खरी-खोटी सुनाने लगती हैं [इस अत्यधिक खरी-खोटी का एहसास उन्हें अधिक होगा जिन्होंने वाल्मीकि रामायण या फिर राधेश्याम रामायण में इस प्रसंग को पढ़ा है]। शेष बातें तो जन-सामान्य को मालूम हैं ही।

*** देवकीनन्दन कृष्ण ब्रज छोड़ कर मथुरा और फिर मथुरा से द्वारिका चले गये। बरसों बाद सूर्य-ग्रहण पर कुरुक्षेत्र के ब्रह्म-सरोवर पर स्नान हेतु सह-कुटुम्ब पहुँचे [कुरुक्षेत्र के ब्रह्म सरोवर में सूर्य-ग्रहण पर स्नान करने का पौराणिक महत्व है]। वहाँ नन्द बाबा, यशोदा मैया तथा अन्य ब्रजवासी भी आये हुये थे। कृष्ण-बलदेव नन्दबाबा यशोदा मैया से ऐसे लिपट कर रो पड़े जैसे कोई बच्चा माँ-बाप से बिछड़ जाय और फिर भटकते-भटकते उसे अपने माँ-बाप मिल जाएँ। वहीं कृष्ण ने इस बात को स्वीकार किया कि ब्रज छोड़ने के बाद उन्हें एक क्षण को भी सुकून नहीं मिला।
दोस्तो ग़ज़ल में माइथोलोजी का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है। अब जिस माइथोलोजी को मैं जानता हूँ उसे कोई एलियन तो नज़्म करने से रहा, सो मैं इस तरह के प्रयास करता रहता हूँ। उम्मीद करता हूँ शायद कुछ लोग इसे पसन्द भी करेंगे।
:- नवीन सी. चतुर्वेदी

बहरे हजज़ मुसमन अखरब मकफूफ महजूफ
मफ़ऊलु मुफ़ाईलु मुफ़ाईलु फ़ऊलुन
221 1221 1221 122


2 comments:

  1. 'ऐसा नहीं बस धरती पे ही रंज़ोअलम हैं
    हर सुब्ह सिसकता है ज़रा देर गगन भी'

    एक सत्य जैसे बड़े अद्भुत तरीके से स्पष्ट कर दिया गया हो!
    बहुत सुन्दर!!!

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  2. नमस्कार महोदय,
    मैंने एक हिंदी साहित्य संकलन नामक ब्लॉग बनाया है,जिन पर साहित्यकारों की रचनाओं के संकलित किया जा रहा है,यदि आप की भी कुछ ग़ज़लें/मुक्तक वहाँ होती तो ब्लॉग की सुंदरता बढ़ जाती.एक बार अवलोकन कर कुछ रचनाये भेजे जो आपके परिचय के साथ प्रकाशित की जायेगी .आपके पेज पर बहुत सारे उच्च कोटि की बेहतरीन ग़ज़लें/मुक्तक हैं,वहाँ से भी संकलित की जा सकती है...एक बार अवलोकन करे.आप लोगो जैसे साहित्यकारों का योगदान चाहिए.
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    आपका स्नेहकांक्षी
    राजेंद्र कुमार

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