8 June 2013

कुछ बातें और आयोजन विषयक घोषणा


आज फेसबुक पर कई जगह एक स्टेटस पढ़ने को मिला We are back in the 90s.....GDP is back to 5%, Dalmiya is back in BCCI, Murthy is back in Infosys, Nawaz Sharif is back in Pakistan, Madhuri is back in bollywood &; Sanjay Dutt is back in Jail.. कितनी सही बात है न.......... सब कुछ 90 वाला माहौल। यार हमें वह शेर याद आ रहा है 

कहते हैं उम्र-ए-रफ़्ता कभी लौटती नहीं
जा मैक़दे से मेरी जवानी उठा के ला ...................  :) 

मई' 90 में हमारी शादी हुई थी, अब उन यादगार दिनों को बस याद ही किया जा सकता है :) क्या छरहरा बदन हुआ करता था हमारा, पर अब तो गुम्बदनुमा होता जा रहा है।

दूसरी ख़बर मालूम पड़ी कि राजस्थान में कहीं गर्ल्स हॉस्टल के बाथरूम्स के ऊपर सीसीटीवी केमेरे पाये गए..... शिट ........ जिस ने ये केमेरे इन्स्टाल किए होंगे उस बेचारे को पता भी न होगा कि इस तरह का इस्तेमाल भी हो सकता है। थेंक गोड
, हम न तो स्पाइ केम्स बेचते हैं और न ही ऊल-जलूल इन्स्टालेशन्स को एङ्करेज करते हैं। ये पंक्तियाँ लिखते-लिखते भी एक सज्जन को अभी सविनय वापस भेजा है।

अब आते हैं आयोजन की बात पर.............. 

छन्द :-  आयोजन का छन्द 'दोहा' है। अभी कुछ आयोजन दोहा छन्द पर ही रहेंगे। आप लोगों के अच्छे दोहे पढ़ने की तीव्र लालसा है।

छन्द के बारे में विशेष :-  शिल्प के बारे में अच्छी तरह बातें हो चुकी हैं। पहले और तीसरे चरण के अंत में 212 ध्वनि / पदभार अनिवार्य। '23 प्रकार के दोहों' का उदाहरण हमारे समक्ष है, इसलिए सभी से पुन: विनम्र निवेदन किया जाता है कि कृपया शिल्प को ले कर अतिवादी प्रयोग न करें। साथ ही इस निवेदन को पढ़ कर आयोजन से मुँह भी न मोड़ लें।

दोहा संख्या  कम या अधिक संख्या निश्चित नहीं करते हैं..... आप स्वयं सोचिए कि आप पाठक को बोर करना चाहते हैं.... या उसे अपना सर्वोत्तम पढ़वाना चाहते हैं।

विषय - हो सके तो उपदेश देने से बचिएगा। हो सके तो हृदय की कोमल भावनाओं को व्यक्त कीजिएगा। आप दोहों को एकाधिक रस केन्द्रित भी कर सकते हैं। यानि विषय चुनाव आप की मर्ज़ी का। ज़िन्दगी हर इंसान के जीवन को विविध रंगों से रँगती है, ऐसे ही किसी भावनात्मक अनुभव को महसूस करने की कोशिश कीजिएगा।

विद्वान साथियों के लिये - विद्वान साथियों से विनम्र निवेदन है कि अन्य दोहों के साथ [सिर्फ़] एक दोहा ऐसा प्रस्तुत करें जिस में रौद्र, श्रंगार और  वात्सल्य रस का एकसाथ समावेश हो। मैं और अरुण निगम जी 'यूरेका यूरेका' कहने को लालायित हैं। ऐसे प्रयोग भूतकाल में हुये हैं, कठिन नहीं है.......... बस माँ शारदे का ध्यान धर कर लेखनी को हाथ में उठाएँ और फिर देखें कैसे उतरता है दोहा ख़ुद-ब-ख़ुद। 

तो साथियो, आप की आज्ञा को शिरोधार्य करते हुये एक बार फिर से आयोजन का श्रीगणेश कर दिया है। आयोजन को कितनी ऊँचाइयों तक ले कर जाना है, यह आप सभी के साझा सहयोग पर निर्भर करेगा। आप के दोहों की प्रतीक्षा रहेगी। चलते-चलते एक निवेदन फिर से दुहराना चाहूँगा कि एक दोहे के लिये कम से कम पाँच दोहे अवश्य लिखें, फिर उन में से एक छाँटें। इस निवेदन पर अमल कर के देखिएगा, आप को फ़र्क स्पष्ट नज़र आएगा।

प्रणाम.....

8 comments:

  1. सुन्दर आयोजन, कितना कुछ पढ़ने को मिल जायेगा।

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  2. अनुपम आयोजन. सफल अवसर अवश्य मिलेगा सुंदर पढ़ने और लिखने का.

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  3. चाहे मनीच पिरोइए, चाहे मानिक लाल ।
    जेते रतनन पोइये, कहिलावै सो माल ॥

    भावार्थ : -- चाहे पुष्प पाइए, चाहे मोती पोइये, चाहे माणिक्य लाल पोइये ।
    चाहे जितने भी रत्न पोइये अन्तत: वह माला ही कहलाएगी,उसी प्रकार
    किसी भी प्रकार से रचिए वह दोहा ही कहलाएगा ॥

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  4. क्या खूब नीतू जी....

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  5. वाह,
    प्रस्तावना ही इतनी मनभावन तो आगे का आयोजन कितना सुन्दर होगा -प्रतीक्षा है!

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