27 September 2012

जिन के तलुवों ने कभी छुई न गीली घास

नमस्कार!

पिछली पोस्ट के बाद समस्या-पूर्ति मंच के सहयोगियों से विचार-विमर्श हुआ।  कुछ संदेश मुझ तक पहुँचे और फायनली प्रस्ताव कुछ यूँ बन रहा है :-

  1. इस बार वाक्य या शब्द की बजाये भाव या विषय पर दोहे आमंत्रित किए जा रहे हैं।
  2. प्रत्येक रचनाधर्मी कम से कम तीन [3] या अधिक से अधिक [7] दोहे प्रस्तुत करें।
  3. दोहे के पहले और तीसरे चरण के अंत में रगण या 212 ध्वनि संयोजन हेतु ग्यारहवीं मात्रा का लघु होना अनिवार्य। पोस्ट को बड़ी नहीं बनाना इसलिये जिन्हें इस बारे में शंका है, वे कमेन्ट या मेल या फिर मुझ से फोन [9967024593] पर बात करने की कृपा करें।
  4. सम्पादन सुविधा इच्छुक व्यक्तियों के लिए उपलब्ध रहेगी। त्रुटिपूर्ण या अवांछनीय रचनाओं पर सम्पादन अवश्यम्भावी रूप से लागू रहेगा।

कविता क्या है? हमारे उद्गारों की अभिव्यक्ति! हर व्यक्ति की ज़िन्दगी एक मुकम्मल डायरी है। कुछ बातें दिल को ठेस पहुँचाती हैं तो कुछ उम्मीद जगाती हैं। देखो तो कण-कण में सौन्दर्य है और सकल ब्रह्मांड किसी आश्चर्य से कम नहीं। हास्य-व्यंग्य के बग़ैर तो ज़िन्दगी है ही अधूरी। ऐसा कोई व्यक्ति नहीं जिस ने जीवन में कभी टोंटिंग न की हो। हर जीवन अपने आप में एक वृहद अनुभव है जिस से अन्य व्यक्ति सीख ले सकते हैं। तो आइये अपनी अनुभूतियाँ अपनों के साथ साझा करें। जो कमाया है जीवन में उसे बाँटें दूसरों के साथ। नीचे सात संकेत दिये जा रहे हैं, एक संकेत / विषय / भाव पर सिर्फ़ एक दोहा यूँ कुल मिला कर कम से कम तीन और अधिक से अधिक सात दोहे प्रस्तुत कीजिएगा [एक बिन्दु पर एक ही दोहा इसलिए ताकि हर रचनाधर्मी अपना सर्वोत्तम ही प्रस्तुत करे] :-
  1. ठेस
  2. उम्मीद 
  3. सौन्दर्य 
  4. आश्चर्य 
  5. हास्य 
  6. वक्रोक्ति 
  7. सीख
संकेत ऊपर दिये गए हैं। विषय-वस्तु-स्थिति वगैरह का चयन आप अपनी रुचि अनुसार करें। यूँ देखें तो 'ठेस' के माध्यम से 'करुण-रस', 'सौन्दर्य' के माध्यम से 'श्रंगार-रस', 'आश्चर्य' के माध्यम से 'अद्भुत-रस' तथा  'हास्य' एवं 'वक्रोक्ति' के माध्यम से 'हास्य-रस' [व्यंग्य]  आधारित दोहे प्रस्तुत किये जा सकते हैं। आप आराम से आवश्यक्तानुसार पर्याप्त समय लीजिएगा और अपने दोहों को अच्छी तरह तराश कर भेजिएगा। आशा है इस आयोजन में कुछ 'कोटेबल' दोहे अवश्य आयेंगे। सभी से विनम्र निवेदन है कि दोहों के प्रेमियों तक इस पोस्ट को पहुँचाने की कृपा करें।

आप के दोहे navincchaturvedi@gmail.com पर भेजने हैं। उत्कृष्ट रचनाओं की प्रशंसा करने का सुअवसर प्रदान कर अनुग्रहीत करें। चलते-चलते एक दोहा:-
जिन के तलुवों ने कभी, छुई न गीली घास
वो क्या समझेंगे भला, मिट्टी की सौंधास

जय माँ शारदे!

15 comments:

  1. मिट्टी की सौन्धास से, महके जिसके प्राण.
    'सलिल' शर्थक श्वास वह, करती जग-संप्राण..

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  2. बहुत अच्छा लगा इस ब्लॉग पर आकर दोहे मुझे अच्छे लगते हैं जरूर प्रयास करुँगी आभार

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  3. हार्दिक शुभकामनाएँ, नवीन भाईजी.. .
    सोचने से बेहतर प्रारूप बना है, बधाई.

    शुभ-शुभ

    सौरभ

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  4. इतना अलभ्य अवसर प्रदान करने के लिये आपका बहुत-बहुत आभार एवं धन्यवाद नवीन जी ! प्रयास तो अवश्य करूँगी सफलता कितनी मिलेगी यह परीक्षा परिणाम पर ही निर्भर होगा ! बहुत आनंद मिलने वाला है आने वाले दिनों में यह तो निश्चित है !

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  5. कुछ अच्‍छे दोहे पढने को मिलेंगे।

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  6. बहुत ही सुन्दर प्रयास, हमें तो पढ़ने में आनन्द आता है ।

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  7. एक बहुत अच्छा प्रयास,,लिखने की कोशिश करूगां,,,,
    आभार,,,,नवीन जी,,,,

    RECENT POST : गीत,

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  8. प्रयास में कोइ कमी नहीं रहेगी नवीन जी |
    आशा

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  9. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 29/09/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  10. सार्थक प्रयास...अच्छा लिख पाई तो भेजूँगी|

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  11. दीर्घ अंतराल के पश्चात बहुप्रतीक्षित और प्रशंसनीय आयोजन के शुभारंभ के लिए बधाई स्वीकार करें।

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  12. अच्छा प्रयास है...प्रयत्न करेंगे ....
    ---अपनी आदतानुसार कहूँगा कि--
    सौंधास...कोई बहुत अच्छा शब्द-संयोजन व प्रयोग नहीं है...

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  13. श्याम जी सदैव की भाँति इस बार भी आप के विचारों का स-सम्मान स्वागत है। साथ ही आप के उत्कृष्ट दोहों की प्रतीक्षा भी है।

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  14. पोस्ट में कही गयी बात को दुहराना चाहूँगा - आवश्यक्तानुसार पर्याप्त समय लें, दोहों को अच्छी तरह तराशें, एक संकेत पर एक ही दोहा प्रस्तुत करें ताकि आप के सर्वोत्कृष्ट से परिचय हो सके। कम से कम तीन [3] अधिक से अधिक सात [7] दोहे।

    कल प्रतुल जी से भी बात हुई है, ख़ुशी है कि उन्होंने मेरे निवेदन के सकारात्मक पक्ष को आत्मसात किया।

    कुछ दोहे आये हैं, पर संबन्धित रचनाधर्मी अभी उन पर तराश का काम ज़ारी रखे हुये हैं।

    ऊट-पटांग कमेंट्स को मैंने डिलीट कर दिया है।

    'प्रयास करेंगे' कहने वाले रचनाधर्मियों से पुन: निवेदन - अपना योगदान दे कर अनुग्रहीत करें।

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