15 April 2011

कुण्डलिया छन्द का विधान उदाहरण सहित

कुण्डलिया है जादुई, छन्द श्रेष्ठ श्रीमान|
दोहा रोला का मिलन, इसकी है पहिचान||
इसकी है पहिचान, मानते साहित सर्जक|
आदि-अंत सम-शब्द, साथ बनता ये सार्थक|
लल्ला चाहे और, चाहती इसको ललिया|
सब का है सिरमौर छन्द, प्यारे, कुण्डलिया||


कुण्डलिया छन्द का विधान उदाहरण सहित

कुण्डलिया है जादुई
२११२ २ २१२ = १३ मात्रा / अंत में लघु गुरु के साथ यति
छन्द श्रेष्ठ श्रीमान|
२१ २१ २२१ = ११ मात्रा / अंत में गुरु लघु
दोहा रोला का मिलन
२२ २२ २ १११ = १३ मात्रा / अंत में लघु लघु लघु [प्रभाव लघु गुरु] के साथ यति
इसकी है पहिचान||
११२ २ ११२१ = ११ मात्रा / अंत में गुरु लघु
इसकी है पहिचान,
११२ २ ११२१ = ११ मात्रा / अंत में लघु के साथ यति
मानते साहित सर्जक|
२१२ २११ २११ = १३ मात्रा
आदि-अंत सम-शब्द,
२१ २१ ११ २१ = ११ मात्रा / अंत में लघु के साथ यति
साथ, बनता ये सार्थक|
२१ ११२ २ २११ = १३ मात्रा
लल्ला चाहे और
२२ २२ २१ = ११ मात्रा / अंत में लघु के साथ यति
चाहती इसको ललिया|
२१२ ११२ ११२ = १३ मात्रा
सब का है सिरमौर
११ २ २ ११२१ = ११ मात्रा / अंत में लघु के साथ यति
छन्द प्यारे कुण्डलिया||
२१ २२ २११२ = १३ मात्रा

7 comments:

  1. नवीन जी,
    एक एक मात्रा जोड़कर बड़े ही विस्तार से कुण्डलिया छन्द के बारे में जानकारी दी है !
    आभार !

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  2. जानकारी सहेज ली है समय मिलते ही प्रयास करती हूँ। बहुत सार्थक काम कर रहे हैं आप। शुभकामनायें।

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  3. Wah Naveen ji,
    kundaliya chhand ko theek se samjhane ke liye isase sundar koi tareeka ,koi udahran ho hi nahi sakta ...jankari dene ke liye aabhar

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  4. ज्ञान चंद भाई, प्रवीण भाई, आदरणीया निर्मला जी, अदरणीय शास्त्री जी एवं ब्रजेश जी आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया| अर्जित ज्ञान को बांटने का किंचित प्रयास किया है|

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  5. सुन्दर जानकारी दी है आपने. कुण्डलिया छंद लिखने वालों को भी पता नहीं होता की उन्होंने जो लिखा है वो कुण्डलिया ही है.

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