अपनी वही ज़ुबान, जो कि हो हिन्दुस्तानी
वो "राखी सरताज", बीस बहना हों जिस के
| rakhi |
गर है सच्चा प्यार - व्यक्त करिए जीते जी
कुण्डलिया छन्द - सरोकारों के सौदे
कुण्डलिया छन्द - वास्तविकता स्वीकारें
काउन्टी किरकेट का, क्रेज़ रहा ना खास||
क्रेज़ रहा ना खास, वास्तविकता स्वीकारें|
निज गृह, जन, गुण, धर्म, समाज सदा सत्कारें|
निज 'भू' ही सम्मान - दिलाती - कहते तो सब|
किंतु समझते लोग, वक्त - समझाता है जब||
टाइप-राय्टर पा गया, यादों में स्थान [ कुण्डलिया]
टाइप-राय्टर पा गया, यादों में स्थान||
यादों में स्थान, बानगी देखो प्यारे|
कम्प्यूटर का दौर, कुलाँचें भर-भर मारे|
गोदरेज-बोयेस, और सहती भी कब तक|
उसने आख़िरकार , बंद करवा दी टकटक|१|
दुनिया का दस्तूर भी, कैसा यार विचित्र|
आज जिसे छूते नहीं, कल हो वही पवित्र||
कल हो वही पवित्र, चित्र उस के लगवाते|
महँगी माला-हार, शान से उसे चढ़ाते|
तारीफों के ढोल, बजाते मुन्ना-मुनिया|
दुर्लभ रत्न समान, देखती उस को दुनिया||
आय्पीयल [IPL] के खेल की बड़ी अनोखी रीत
हाँ पर ये भी बात, माननी होगी निश्छल|
कुण्डलिया छन्द का विधान उदाहरण सहित
कुण्डलिया वह छन्द है जिसकी ऊँची शान
दोहे, रोले का मिलन, है इसकी पहिचान
है इसकी पहिचान
तरलता और सरलता
आदि अन्त सम
शब्द केन्द्र में रहे चपलता
मन के भाव
प्रसून कथ्य फूलों की डलिया
फैलाता है गन्ध
हवा बनकर कुण्डलिया
कुण्डलिया छन्द का विधान उदाहरण सहित
कुण्डलिया वह
छन्द है
२११२ ११ २१२ =
१३ मात्रा / अंत में लघु गुरु के साथ यति
जिसकी ऊँची शान
११२ 22 २१ = ११
मात्रा / अंत में गुरु लघु
दोहे, रोले का मिलन
२२ २२ २ १११ =
१३ मात्रा / अंत में लघु लघु लघु [प्रभाव लघु गुरु] के साथ यति
है इसकी पहिचान
२ ११२ ११२१ =
११ मात्रा / अंत में गुरु लघु
है इसकी पहिचान
२ ११२ ११२१ =
११ मात्रा / अंत में लघु के साथ यति
तरलता और सरलता
१११२ २१ १११२ =
१३ मात्रा
आदि अन्त सम
शब्द
२१ २१ ११ २१ =
११ मात्रा / अंत में लघु के साथ यति
केन्द्र में
रहे चपलता
२१ २ १२ १११२ =
१३ मात्रा
मन के भाव
प्रसून
११ २ २१ १२१ =
११ मात्रा / अंत में लघु के साथ यति
कथ्य फूलों की
डलिया
२१ २२ २ ११२ =
१३ मात्रा
फैलाता है गन्ध
२२२ २ २१ = ११
मात्रा / अंत में लघु के साथ यति
हवा बनकर
कुण्डलिया
१२ ११११ २११२ = १३ मात्रा
अभिव्यक्ति
छन्द - कुण्डलिया - एक्सक्यूजी परसन
सज्जन वो, तुम जान लो, करते हैं कन्फ्यूज||
करते हैं कन्फ्यूज, पूजते दिखते जाहिर|
किंतु हमारी टाँग, खींचने में वो माहिर|
इतने बदलें रंग, कि शरमा जाए मौसम|
फिर भी ख़ासमखास, चहेते सबके हरदम||
IPL Sale पर एक छंद
खड़े रह गये टापते, लारा, सौरव, गेल
लारा, सौरव, गेल, सनथ भी फेल हो गये
कई तजुर्बेकार, यहाँ बेमेल हो गये
मोदी, पाकिस्तान, तजुर्बे की इ फजीती
दिला गयी फिर याद, अनगिनत बातें बीती
आने वाले नये साल [केलेंडर ईयर] की ढेर सारी शुभकामनाएँ
बढ़िया पहनें-खायँ हम, बढ़िया हों व्यवहार||
बढ़िया हों व्यवहार, यार आमद या खर्चे|
बढ़िया हों आधार, करें सब बढ़िया चर्चे|
बढ़िया मेल मिलाप होयँ बढ़िया ट्रांजेक्शन|
बढ़िया हो नव-वर्ष, रहे ना कोई टेंशन||
नीती में अंतर न हो, प्रीति बढ़े दिन रात|
दुर्बल- निर्धन व्यक्ति पे, करें न हम आघात||
करें न हम आघात, बात बस इतनी प्यारे|
दम दम दमके चंद्र, साथ जब चमकें तारे|
हिल मिल हम रह पायँ, भूल कर बातें बीती|
औरों को बतलायँ - वही - जो पालें नीती||
सभी साहित्य रसिकों को आने वाले नये साल [केलेंडर ईयर] की ढेर सारी शुभकामनाएँ|