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अपनी वही ज़ुबान, जो कि हो हिन्दुस्तानी





अङ्ग्रेज़ी में दागते, हिन्दी के गुणगान
उदघोषक हैं टॉप के, ऊँची उन की शान
ऊँची उन की शान, ज्ञान की खान लुटाते
करें प्रज्वलित दीप, और फिर 'पैग' चढाते
देखा जब यह खेल, हो गए हम भी crazy
हिन्दी वाली 'आय' और खर्चे 'अङ्ग्रेज़ी’

हिन्दी, हिन्दी, हिन्दवी, गूँजे चारों ओर 
हिन्दी-हिन्दुस्तान का, दुनिया भर में शोर
दुनिया भर में शोर, होड़ सी मची हुई है
पहले पहुँचे कौन, शर्त सी लगी हुई है
करो नहीं तुम भूल, समझ कर इस को चिन्दी
गूगल, माय्क्रोसोफ्ट, आज सिखलाते हिन्दी

हिन्दी में ही देखिये, अपने सारे ख़्वाब
हिन्दी में ही सोचिये, करिये सभी हिसाब
करिये सभी हिसाब, ताब है किस की प्यारे
ऐसा करते देख, आप को जो दुत्कारे
एप्लीकेशन-फॉर्म, भले न भरें हिन्दी में
पर अवश्य परिहास-विलाप करें हिन्दी में

हिन्दी भाषा से अगर, सचमुच में हो प्रेम
तो फिर मेरे साथ में, अभी लीजिये नै'म
अभी लीजिये नै'म, सभी मुमकिन हिस्सों में
हिन्दी इस्तेमाल - करें सौदों-क़िस्सों में
छोटी सी बस मित्र यही अपनी अभिलाषा
दुनिया में सिरमौर बने यह  हिन्दी भाषा

हिन्दुस्तानी बोलियों, को दे कर सम्मान
अङ्ग्रेज़ी को भी मिले, कहीं-कहीं पर स्थान
कहीं-कहीं पर स्थान, तभी भाषा फैलेगी
पब्लिक ने इन्ट्रेस्ट लिया, तब ही पनपेगी
भरी सभा के मध्य, बात कहते ऐलानी
अपनी वही ज़ुबान, जो कि है हिन्दुस्तानी



[हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में]

वो "राखी सरताज", बीस बहना हों जिस के


rakhi


बहना की दादागिरी, भैया की मनुहार|
ये सब ले कर आ रहा, राखी का त्यौहार||
राखी का त्यौहार, यार क्या कहने इस के|
वो "राखी सरताज", बीस बहना$ हों जिस के|
ठूँस-ठूँस तिरकोन*, मिठाई खाते रहना|
फिर से आई याद, हमें राखी औ बहना||

सबसे पूर्व सगी-बड़ी, बहना का अधिकार|
उस के पीछे साब जी, लाइन लगे अपार||
लाइन लगे अपार, तिलक लगवाते जाओ|
गिन गिन के फिर नोट, तुरंत थमाते जाओ| 
मॉडर्न डिवलपमेंट, हुआ भारत में जब से|
ये अनुपम आनंद, छिन गया, तब से, सब से|| @



*मथुरा में समोसे को तिरकोन कहा जाता है [त्रिकोण जैसा दिखने के कारण]

$ अपनी बहन, चाची, काकी, भुआ, मौसी और मामियों की लड़कियां मिला कर
बीस बहनें भी होती थीं किसी किसी के| और भुआयें अलग से - बोनस में|

@ सुख भरी यादों के बीच दुखांत तो है, पर समय की सच्चाई भी यही है

छन्द - कुण्डलिया 

गर है सच्चा प्यार - व्यक्त करिए जीते जी

जीते जी पूछें नहीं, चलें निगाहें फेर
आँख मूँदते ही मगर,  तारीफों के ढेर
तारीफों के ढेर, सुनाते अद्भुत किस्से
क्या सच है - क्या झूठ, कौन पूछे ये किस से
मृत्यु बाद सन्ताप - भला क्या सिद्ध करे जी

गर है सच्चा प्यार - व्यक्त करिए जीते जी

कुण्डलिया छन्द - सरोकारों के सौदे

अक्सर ऐसे भी दिखें, कुछ modern परिवार|
मिल जुल कर ज्यों चल रही, गठबंधन सरकार||
गठबंधन सरकार, सरोकारों के सौदे|
अपने-अपने भिन्न, सभी के पास मसौदे|
नित्य नया सा खेल, खेलते हैं ले-दे कर|
दिखते संग, परंतु, दूर होते हैं अक्सर||

कुण्डलिया छन्द - वास्तविकता स्वीकारें

जब से आइ पि एल ने, यार जगाई आस|
काउन्टी किरकेट का, क्रेज़ रहा ना खास||
क्रेज़ रहा ना खास, वास्तविकता स्वीकारें|
निज गृह, जन, गुण, धर्म, समाज सदा सत्कारें|
निज 'भू' ही सम्मान - दिलाती - कहते तो सब|
किंतु समझते लोग, वक्त - समझाता है जब||



अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आइ सी सी की चौधराहट को आप लोग भूले नहीं होंगे| पर जब से आइ पी एल फॉर्मेट मशहूर हुआ है, इस को ले कर जब-तब आपत्तियाँ दर्ज कराई जाती रही हैं| हम मानते हैं कि आइ पी एल की अपनी खामियाँ हैं, पर क्या आइ सी सी दूध धुली थी? या है?

आज कम से कम भारतीय हुनरमंद प्रतियोगी किसी की इनायत के मोहताज तो नहीं हैं...................

भाई हमने तो अपने मन की बात कह दी है............................. आप क्या कहते हैं?

टाइप-राय्‍टर पा गया, यादों में स्थान [ कुण्डलिया]

टकटक की आवाज़ अब, नहीं सुनेंगे कान|
टाइप-राय्‍टर पा गया, यादों में स्थान||
यादों में स्थान, बानगी देखो प्यारे|
कम्‍प्यूटर का दौर, कुलाँचें भर-भर मारे|
गोदरेज-बोयेस, और सहती भी कब तक|
उसने आख़िरकार , बंद करवा दी टकटक|१|

दुनिया का दस्तूर भी, कैसा यार विचित्र|
आज जिसे छूते नहीं, कल हो वही पवित्र||
कल हो वही पवित्र, चित्र उस के लगवाते|
महँगी माला-हार, शान से उसे चढ़ाते|
तारीफों के ढोल, बजाते मुन्ना-मुनिया|
दुर्लभ रत्न समान, देखती उस को दुनिया||

आय्पीयल [IPL] के खेल की बड़ी अनोखी रीत

आय्पीयल [IPL] के खेल की बड़ी अनोखी रीत|
सभी कमाते हैं यहाँ, हार मिले या जीत||
हार मिले या जीत, भींत से मत्था मारूँ|
धोनी-सचिन विरुद्ध, जभी युवराज निहारूँ|
हाँ पर ये भी बात, माननी होगी निश्छल|
गुमनामों के हेतु, श्रेष्ठ वर है आय्पीयल||

कुण्डलिया छन्द का विधान उदाहरण सहित

कुण्डलिया वह छन्द है जिसकी ऊँची शान

दोहे, रोले का मिलन, है इसकी पहिचान

है इसकी पहिचान तरलता और सरलता

आदि अन्त सम शब्द केन्द्र में रहे चपलता

मन के भाव प्रसून कथ्य फूलों की डलिया

फैलाता है गन्ध हवा बनकर कुण्डलिया

 

कुण्डलिया छन्द का विधान उदाहरण सहित

 

कुण्डलिया वह छन्द है

२११२ ११ २१२ = १३ मात्रा / अंत में लघु गुरु के साथ यति

जिसकी ऊँची शान

११२ 22 २१ = ११ मात्रा / अंत में गुरु लघु

दोहे, रोले का मिलन

२२ २२ २ १११ = १३ मात्रा / अंत में लघु लघु लघु [प्रभाव लघु गुरु] के साथ यति

है इसकी पहिचान

२ ११२ ११२१ = ११ मात्रा / अंत में गुरु लघु

है इसकी पहिचान

२ ११२ ११२१ = ११ मात्रा / अंत में लघु के साथ यति

तरलता और सरलता

१११२ २१ १११२ = १३ मात्रा

आदि अन्त सम शब्द

२१ २१ ११ २१ = ११ मात्रा / अंत में लघु के साथ यति

केन्द्र में रहे चपलता

२१ २ १२ १११२ = १३ मात्रा

मन के भाव प्रसून

११ २ २१ १२१ = ११ मात्रा / अंत में लघु के साथ यति

कथ्य फूलों की डलिया

२१ २२ २ ११२ = १३ मात्रा

फैलाता है गन्ध

२२२ २ २१ = ११ मात्रा / अंत में लघु के साथ यति

हवा बनकर कुण्डलिया

१२ ११११ २११२ = १३ मात्रा

अभिव्यक्ति

व्यक्ती से बढ़ कर सदा, होता इस का मान|
सब के सर चढ़ बोलती, इक नन्ही सी जान||
इक नन्ही सी जान, शान से रहती हरदम|
जो भी दिल में आय, बताती झट्ट फडक्दम|
इस का मूल विवेक, शख्सियत इसकी शक्ती|
कहना इस का काम, नाम इस का अभिव्यक्ती||

छन्‍द - कुण्‍डलिया - एक्सक्यूजी परसन

हरदम ही देते रहें, ये या वो एक्स्क्यूज|
सज्जन वो, तुम जान लो, करते हैं कन्‍फ्यूज||
करते हैं कन्‍फ्यूज, पूजते दिखते जाहिर|
किंतु हमारी टाँग, खींचने में वो माहिर|
इतने बदलें रंग, कि शरमा जाए मौसम|
फिर भी ख़ासमखास, चहेते सबके हरदम||

IPL Sale पर एक छंद

बीती बीते वीक में, आय्पीयल की सेल
खड़े रह गये टापते, लारा, सौरव, गेल
लारा, सौरव, गेल, सनथ भी फेल हो गये
कई तजुर्बेकार, यहाँ बेमेल हो गये
मोदी, पाकिस्तान, तजुर्बे की इ फजीती
दिला गयी फिर याद, अनगिनत बातें बीती

आने वाले नये साल [केलेंडर ईयर] की ढेर सारी शुभकामनाएँ

टेंशन सारी छोड़ के, बढ़िया करें विचार|
बढ़िया पहनें-खायँ हम, बढ़िया हों व्यवहार||
बढ़िया हों व्यवहार, यार आमद या खर्चे|
बढ़िया हों आधार, करें सब बढ़िया चर्चे|
बढ़िया मेल मिलाप होयँ बढ़िया ट्रांजेक्शन|
बढ़िया हो नव-वर्ष, रहे ना कोई टेंशन||

नीती में अंतर न हो, प्रीति बढ़े दिन रात|
दुर्बल- निर्धन व्यक्ति पे, करें न हम आघात||
करें न हम आघात, बात बस इतनी प्यारे|
दम दम दमके चंद्र, साथ जब चमकें तारे|
हिल मिल हम रह पायँ, भूल कर बातें बीती|
औरों को बतलायँ - वही - जो पालें नीती||


सभी साहित्य रसिकों को आने वाले नये साल [केलेंडर ईयर] की ढेर सारी शुभकामनाएँ|