8 March 2013

हमें भी दिखा दो क़िताबों की दुनिया - ओम प्रकाश नदीम


हमें भी दिखा दो किताबों की दुनिया 

हमारा भी मन है कि स्कूल जाएँ
पहाड़ा रटें और गिनती सुनाएँ 
ककहरा से बातें करें और सीखें 
कहाँ लगती हैं कौन सी मात्राएँ 
गुणा-भाग को जोड़-बाक़ी को समझें

ज़रा हम भी देखें हिसाबों की दुनिया 
हमें भी दिखा दो किताबों की दुनिया 

हमें अक़्ल से कोई पत्थर न समझे 
जो बदले न ऐसा मुक़द्दर न समझे 
कि हम लड़कियाँ भी बराबर हैं क़ाबिल 
हमें कोई लड़कों से कमतर न समझे 
हमें भी तमन्ना है देखें तुम्हारे ,
सवालों की दुनिया,जवाबों की दुनिया 
हमें भी दिखा दो किताबों की दुनिया 

पढ़ेंगे लिखेंगे तो आगे बढ़ेंगे 
तरक्क़ी की सीढ़ी पे हम भी चढ़ेंगे 
समझ को नयी रौशनी दे सके जो 
वो साईंस का पाठ हम भी पढ़ेंगे 
कि हमको भी अब रास आने लगी है 
पढ़े लिक्खे लोगों के ख़्वाबों की दुनिया 
हमें भी दिखा दो किताबों की दुनिया 

ये सूरज का गोला, ये चन्दा ये तारे 
हवा में टँगे हैं ये किसके सहारे 
इस आकाश में और क्या क्या छुपा है 
हमें घेरे रहते हैं ये प्रश्न सारे 
हमारी तरह है कि हमसे अलग है 
फ़लक पर चमकते नवाबों की दुनिया 
हमें भी दिखा दो किताबों की दुनिया 

बहारों के मौसम ,खिज़ाओं के झोंके 
ये गर्म और ठंडी हवाओं के झोंके 
ये बिजली ये बादल ये बारिश की रिमझिम 
लरज़ती गरजती सदाओं के झोंके 
कहाँ तक है रंग और ख़ुशबू का आलम 
कहाँ तक है काँटों गुलाबों की दुनिया 
हमें भी दिखा दो किताबों की दुनिया 

अगर हमको तालीम हो जाए हासिल 
तो आगे की नस्लों को मिल जाए मंज़िल 
मिला कर तुम्हारे क़दम से क़दम हम 
करें दूर मिलजुल के आये जो मुश्किल 
नए रंग भर कर नए रूप देकर 
बना दें इसे कामयाबों की दुनिया 
हमें भी दिखा दो किताबों की दुनिया 

तुम्हारी तरह ये हमारा भी हक़ है 
हमारा भी हक़ है,हमारा भी हक़ है 
हमें भी दिखाओ ,हमें भी दिखाओ 
हमें भी दिखाओ किताबों की दुनिया 

:- ओम प्रकाश नदीम
+91 9456460659 

6 comments:

  1. बहुत सुंदर रचना,,,नदीम जी से परिचय क्र्राने के लिए आभार,,

    Recent post: रंग गुलाल है यारो,

    ReplyDelete
  2. बहुत सोहती है, किताबों की दुनिया।

    ReplyDelete
  3. हमें भी दिखाओ कलम-ओ-क़ुतुब का जहां..,
    कहाँ लफ्जों का महल है कहाँ हर्फ़ का मुहल्ला.....

    ReplyDelete
  4. लाजवाब रचना...हमें भी दिखा दो किताबों की दुनिया !!

    ReplyDelete
  5. पढ़ेंगे लिखेंगे तो आगे बढ़ेंगे
    तरक्क़ी की सीढ़ी पे हम भी चढ़ेंगे
    समझ को नयी रौशनी दे सके जो
    वो साईंस का पाठ हम भी पढ़ेंगे
    कि हमको भी अब रास आने लगी है

    बहुत सरल शब्द और सुन्दर प्रवाहमयी रचना

    ReplyDelete
  6. बहुत उम्दा प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

    ReplyDelete

यहाँ प्रकाशित सभी सामग्री के सभी अधिकार / दायित्व तत्सम्बन्धित लेखकाधीन हैं| अव्यावसायिक प्रयोग के लिए स-सन्दर्भ लेखक के नाम का उल्लेख अवश्य करें| व्यावसायिक प्रयोग के लिए पूर्व लिखित अनुमति आवश्यक है|

साहित्यम पर अधिकान्शत: छवियाँ साभार गूगल से ली जाती हैं। अच्छा-साहित्य अधिकतम व्यक्तियों तक पहुँचाने के प्रयास के अन्तर्गत विविध सामग्रियाँ पुस्तकों, अनतर्जाल या अन्य व्यक्तियों / माध्यमों से सङ्ग्रहित की जाती हैं। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री पर यदि किसी को किसी भी तरह की आपत्ति हो तो अपनी मंशा विधिवत सम्पादक तक पहुँचाने की कृपा करें। हमारा ध्येय या मन्तव्य किसी को नुकसान पहुँचाना नहीं है।

My Bread and Butter