15 January 2011

छन्द - अमृत-ध्वनि - मकर संक्रांति

जीवन हिल मिल कर जियो, दूर करो हर भ्रांति|
सब से ये ही कह रहा, पर्व मकर संक्रांति||
पर्व मकर संक्रांति, सु-लायक, शांति प्रदायक|
नीति विधायक, प्रीति सु-भायक, रीति निभायक|
शुभ वरदायक, मंगल गायक, नायक जन-मन|
सदगुणदायक, दोष नशायक, दायक जीवन||

19 comments:

  1. जीवन हिल मिल कर जियो, दूर करो हर भ्रांति।
    सब से ये ही कह रहा, पर्व मकर संक्रांति।।

    मिल-जुल कर जीना ही तो जीना है...

    मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर आपने बहुत सुंदर छंद प्रस्तुत किया है। पढ़कर अच्छा लगा।

    शुभकामनाएं।

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  2. सुंदर तरीके से शानदार छंद के माध्यम से यह संदेश हम सब पहुँचाने के लिए धन्यवाद और शुभकामनाएँ

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  3. अब सूर्य आ रहा है अपनी ओर, ऊर्जावान। इस संक्रमण की बधाई।

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  4. मकर संक्रांति की आप को भी ढेरों बधाइयाँ...
    नीरज

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  5. उत्तरायणी के बधाई!
    सुन्दर छंद लिखे हैं आपने!

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  6. Alag pahchan banati rachana....badhai

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  7. बहुत सुन्दर छंद लिखे है नवीन भाई ।

    मकर संक्रान्ति की ढेरोँ शुभकामनायेँ ।

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  8. बहुत अच्छा छन्दबद्ध संदेश।

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  9. महेंद्र जी, धर्मेन्द्र जी, प्रवीण जी, नीरज जी, शास्त्री जी, पंकज त्रिवेदी जी, अशोक जी और मनोज जी आप सभी को भी इस महान पर्व की ढेरों शुभ कामनाएँ और सराहना के लिए बहुत बहुत आभार|

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  10. कुंडलिया में पिरोये गये भावों के लिए ढेर सारी बधाई ।

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  11. सुन्दर अभिव्यक्ति.

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  12. सक्रांति ...लोहड़ी और पोंगल....हमारे प्यारे-प्यारे त्योंहारों की शुभकामनायें आपको भी

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  13. बेहद सुन्दर सन्देश

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  14. सुन्दर छन्द।

    आपको मकर संक्रान्ति पर्व की शुभकामनाएं।

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  15. उमाशंकर जी, कुँवर जी, रचना जी, चैतन्य जी और हरीश जी आप सभी को बहुत बहुत शुभ कामनाएँ तथा सराहना के लिए सहृदय आभार|

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  16. ्मृतधव्नि छंद का तो अपना अलग ही आनन्द होता है!
    विडम्बना यह है कि नये लोग पुराने छंदों को भूलते जा रहे हैं!
    --
    आप निश्चित रूप से यह अच्छा कार्य कर रहे हैं!
    एतदर्थ आपको साधुवाद देता हूँ!

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  17. बहुत सुन्दर छन्द है। बधाई।

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  18. आदरणीय निर्मला जी बहुत बहुत आभार

    आदरणीय शास्त्री जी सराहना और उत्साह वर्धन के लिए सहृदय आभार| आप गुणी जनों के आशीर्वाद के साथ साहित्य सेवा करने का आनंद ही अलग है|

    कुण्डलिया की तरह दिखने वाला यह 'अमृत ध्वनि छंद' एक दुर्लभ छंद है जो कि पिछले पाँच-छह दशकों से कम ही पढ़ने में आया है| आपने मेरे प्रयास को सराहा, यह मेरे लिए परम आनंद की बात है| आपका स्नेह बनाए रखिएगा|

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