14 January 2011

'क्लासिक' रहा है आदमी

IPL में खिलाड़ियों के Gladiators की तरह बिकने पर संसदीय टिप्पणी के सन्दर्भ में:-,


हर दौर में 'अपने लिए माफिक' रहा है आदमी|
संक्षेप में कहिए अगर 'क्लासिक' रहा है आदमी|
किस दौर में खोए हो तुम, किस के लिए बेचैन हो|
अब तो स्वयँ बाजार में जा, बिक रहा है आदमी||






3 comments:

  1. विचित्र ही कहा जाये इसे।

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  2. हरिगीतिका में अभिव्यक्ति हेतु बधाई।

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  3. प्रवीण भाई और संजय भाई बहुत बहुत आभार

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