6 January 2011

कोई तो बताए कि ये कैसा लोकतंत्र है

सुखियों को और सुखी करने की है जुगाड़
दुखियों को और दुखी करने का मंत्र है|

खुलेआम लूटपाट करने का लाइसेंस
जन-धन हरने का स्व-चालित यंत्र है|

जेल [jail] वाला बेल [bail] वाला हर एक नागरिक
इलेक्शन लड़ने का जहाँ पे स्वतंत्र है|

लोकपाल जहाँ करे गोलमाल दे धमाल
कोई तो बताए कि ये कैसा लोकतंत्र है||

6 comments:

  1. व्यंग से लबरेज़ बहुत ही सुन्दर कविता।

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  2. वाह ! ........... नवीन जी बहुत बढ़िया.....क्या चोट की है लोकतंत्र पर । बहुत बहुत आभार !

    गजल...........खुदा से भी पहले हमेँ याद आयेगा कोई "

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  3. सटीक व्यंग्य रचना!

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  4. व्यंग पर सच उघाड़ता हुआ।

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  5. सभी मित्रों का सहृदय आभार

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