22 August 2013

सनसनीखेज़ हुआ चाहती है - नवीन

सनसनीखेज़ हुआ चाहती है 
तिश्नगी तेज़ हुआ चाहती है 
तिश्नगी - प्यास 

हैरत-अंगेज़ हुआ चाहती है 
आह - ज़रखेज़ हुआ चाहती है 
ज़रखेज़ - उपजाऊ [ज़मीन]

अपनी थोड़ी सी धनक दे भी दे 
रात रँगरेज़ हुआ चाहती है 

आबजू देख तेरे होते हुये 
आग - आमेज़ हुआ चाहती है 
आबजू - झरना-नदी-नहर आदि, आमेज़ - मिलाने वाला 

बस पियाला ही तलबगार नहीं 
मय भी लबरेज़ हुआ चाहती है 
लबरेज़ - लबालब भरा हुआ, लबालब भरना  

रौशनी तुझ से भला क्या परहेज़ 
तू ही परहेज़ हुआ चाहती है 

हम फ़क़ीरी के 'इशक' में पागल 
जीस्त - पर्वेज़ हुआ चाहती है 
जीस्त - ज़िन्दगी, परवेज़ - प्रतिष्ठित, विजेता के सन्दर्भ में 

:- नवीन सी. चतुर्वेदी 

बहरे रमल मुसद्दस मखबून मुसक्कन 
फ़ाएलातुन फ़एलातुन फ़ालुन 

2122 1122 22

5 comments:

  1. बहुत बहुत सुन्दर.बहुत खूब.बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. बहुत सुन्दर रचना..

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  2. उम्दा सोच की उत्तम प्रस्तुति
    लाजबाब ग़ज़ल बन गई

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  3. ऐसी हिन्दी का क्या हासिल श्याम,
    उर्दू-लवरेज हुआ चाहती है |


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  4. कुछ अलग ही है यह रचना !
    बधाई !

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