8 June 2017

आमच्या दुष्यन्तची अभिलाष फिटली पाहिजे - नवीन

आमच्या दुष्यन्तची अभिलाष फिटली पाहिजे। 
मान्य कर बा शंकरा! गंगा उतरली पाहिजे॥ 

व्यक्तिगत आलोचकांनो एवढे ऐकून घ्या। 
व्यक्तिगत आलोचनांची ढब बदलली पाहिजे॥ 

पूल थरथरता असू दे अन् नदीला पूरही। 
फक्त हे लक्षात घ्या गाडी निसटली पाहिजे॥ 

ओफफो संकोच कसला, यात आहे फायदा। 
पाहिजे परिणाम तर चर्चा घडवली पाहिजे॥ 

लोकशाहीच्या मधेही लोकही मरणार तर। 
लोकशाहीच्या बळीची वेळ ठरली पाहिजे॥

नवीन सी चतुर्वेदी




[शायर की माँ-बोली मराठी नहीं है]

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काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

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