दुखों को पार कर
मैं लौटना चाहता हूँ
जैसे लौट आता है सूरज
रोज़ रोज़ अल सुबह
मैं लौटना चाहता हूँ
जैसे लौट आता है चाँद
दुखों को पार कर
मैं लौटना चाहता हूँ
जैसे लौट आता है सूरज
रोज़ रोज़ अल सुबह
मैं लौटना चाहता हूँ
जैसे लौट आता है चाँद
ये सत्य है कि तुमसे प्रेम है
प्रेमरत जिसे निहारती हूँ
रोज़
उस चाँद का घटना-बढ़ना भी
सत्य है
कड़ुआ सच यह भी है कि
पूर्णता में चाँद की
सड़क किनारे खड़े वृक्षों
में
जो चमकता है सर्वाधिक
वो एक ठूँठ है
निर्बाध चलती सड़क भी सत्य
है
शेष सब झूठ है...
ये माज़ी की गलियाँ, वो यादों के घेरे
जहाँ रात-दिन हैं उदासी के फेरे
हैं अंजान से जाने-पहचाने चेहरे
मेरे दर्द-ओ-वहशत से बेगाने चेहरे
हैं ओढ़े मोहज़्ज़ब वफ़ा की नक़ाबें
पिये हैं जो जी भर ख़ुदी की शराबें
है इन पर चढ़ा उल्फ़तों का मुलम्मा
हैं बातें पहेली, अदाएँ मोअम्मा
हैं बदशक्ल चेहरे नक़ाबों के पीछे
भाग्यशाली हूँ, ईर्ष्या, कुण्ठा, प्रतिस्पर्धा का कारण हूँ
वैसे तो रीढ़ की हड्डी ही उसके संसार की हूँ ,पर
ब्रांडेड, चमकदार कपड़ों से ढँकी -छुपी रहती हूँ
एक बड़े आदमी की पत्नी हूँ मैं…
याति भीतिभयभीषणं वर्षं दर्पितमेव,
जनयेज्जनगणमङ्गलं ,नववर्षं हे
देव !
जनगणमनमंगल करे,हे भगवन् पच्चीस ।
राधे! राधे!राधिका, मोहन!मोहन! श्याम।
दोनों ही जपने लगे,अपना-अपना
नाम।।
एक दूसरे को जपें, निशिदिन, आठों
याम।
साधारण प्रेमी नहीं, हैं राधा-घनश्याम।।
25 अगस्त, 1953 को जितौरा ,पियरो,आरा , बिहार में जन्मे आदरणीय रमेश कँवल जी भी उन चुनिन्दा लोगों में शामिल हैं जिनकी कि ऊर्जा कोविड के बाद कई गुना बढ़ गयी. कोविड की त्रासदी को दरकिनार करते हुए आप ने ईसवी सन 2021 में विभिन्न शायरों द्वारा
आई है नव वर्ष की, नई नवेली भोर
।
खिड़की से दिल की मुझे, झाँक रहा
चितचोर ।।
पहुँची हो चौबीस में, लेखन से कुछ
ठेस ।
क्षमा ह्रदय से माँगता, उनसे आज रमेश ।।
बुलबुल का भी दिल अब पिंजरे में शायद बेताब नहीं होता
जिस दिन से सुना है फूलों पर वो हुस्नो शबाब नहीं होता
आभा दवे मूलतः गुजराती भाषी हैं साथ ही हिंदी भाषा पर उनका अधिकार दर्शनीय है . विवेच्य कविता संग्रह में आप ने भाषा के सरल और सरस प्रारूप को चुना है . विषय भी बहुत बोझल न हो कर आम जन से जुड़े हुए प्रतीत होते हैं . दरअसल कविता लिखते समय कुछ लोग विशिष्ट शैली के उपदेशक होने का प्रहसन करने से स्वयं को रोक नहीं पाते . इस दृष्टिकोण से आभा दवे ने स्वयं को साक्षीभाव के स्तर पर बनाए रखा है . यह इनका चौथा काव्य संग्रह है और इन्होंने भूमिका में स्पष्ट रूप से लिखा है कि इनकी कविताएँ स्वान्तः सुखाय हैं . पुस्तक का प्रकाशन इण्डिया नेट बुक्स द्वारा किया गया है और इसका मूल्य है २५०.०० रुपये . इस कविता संग्रह से कुछ उद्धरण
जमुना किनारे राधा पुकारे
ढूँढे फिरे वह साँझ सकारे
छुप गये कान्हा तुम कहाँ
तुम तो बने थे मेरे सहारे
*
चिलचिलाती धूप में वो बनाता है मकान आलीशान
जिसका खुद के रहने के लिए भी नहीं होता मकान
पर उसके चेहरे पर रहता नहीं है कोई भी मलाल
रह जायेगा उसके ही काम का इस धरा पर निशान
*
जब मुस्कुराती हैं ये लड़कियाँ
गजब ही ढाती हैं ये लड़कियाँ
जमाना दुश्मन क्यों न बन जाये
हर जुल्म सह जाती हैं ये लड़कियाँ
ऐसी सीधी सादी सरल और मृदुल कविताओं को पढने के लिए आप आभा दवे जी की इस पुस्तकको पढ़ सकते हैं .
आभा दवे जी का पता और फोन नंबर
बी/७/१०३,साकेत काम्प्लेक्स, थाने - पश्चिम - ४००६०१ (मुम्बई)
मोबाइल - ९८६९३९६७३१
सबसे पहले 2020 की नुमाइन्दा ग़ज़लों का संकलन प्रकाशित किया . उसके बाद इक्कीसवीं सदी के इक्कीसवें साल की बेहतरीन ग़ज़लों का संकलन प्रस्तुत किया . तीसरे नम्बर पर एक रुकनी अनूठी ग़ज़लों का संकलन निकाला और अब स्वतंत्रता के 75 वें वर्ष में 75 चुनिन्दा रदीफ़ों पर ताबिन्दा ग़ज़लों के
साथ दस्तक दी है
आज के दौर में जहाँ नये लोगों से मात्र दो या चार रचनाएँ छापने के लिए साझा संकलन
के नाम पर लोग हज़ार पाँच सौ रुपये बेझिझक माँग लेते हैं वहीं रमेश कँवल जी ने अनेक
शायरों / शायराओं को देश के कोने कोने तक बिना
एक भी पैसा लिए पहुँचाने का पुण्यकर्म किया है ।
रमेश कँवल जी स्वयं भी एक सिद्धहस्त शारदात्मज हैं । विषय के जानकार हैं और उनकी
ग़ज़लें तमाम पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं । इनकी कुछ ग़ज़लों को ग़ज़ल गायकों
ने गाया भी है । रमेश जी अपने काव्यगुरु श्री हफ़ीज़ बनारसी जी की स्मृति में सालाना
जलसे भी करवाते रहते हैं ।
रमेश जी के काम को एक पोस्ट में समेट पाना बहुत कठिन है । इनके प्रयासों के गाम्भीर्य को समझने के लिए इनके
उपरोक्त संकलनों को पढ़ना चाहिए । जहाँ एक ओर रमेश जी ने शायरी की भरपूर ख़िदमत की है
वहीं दूसरी ओर इन्होंने राष्ट्र गौरव के प्रतीकों, गाथाओं
और उद्धरणों को अपने संकलनों में प्रमुखता से स्थान दिया है ।
रमेश
जी का पता और मोबाइल नम्बर
रमेश
कँवल
6, मंगलम विहार कॉलोनी, आरा
गार्डन रोड,
जगदेव
पथ, पटना –
800014
मोबाइल
- 8789761287