हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
( विदाई गीत )
हम तो हई बाबा अंगना के चिड़िया
चहकीले हम सुबहो-शाम हो
काहिके शदियां रचाव तारा बाबा
काहे देते घर से निकाल हो