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संस्कृत गजल - वञ्चनारीतेःकृतं केन कदा सम्पादनम् – डॉ लक्ष्मीनारायण पाण्डेय

 

(संस्कृत गज्जलिका भावानुवाद सहिता)

 

वञ्चनारीतेःकृतं केन कदा सम्पादनम्

नीयते हृदयं समोदं दीयते सन्तापनम्

 

रीति यह किसने चलाई और कबसे बोल तो

मुस्कुराते दिल को लेकर भेंट करना पीर को