हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
बुलबुल का भी दिल अब पिंजरे में शायद बेताब नहीं होता
जिस दिन से सुना है फूलों पर वो हुस्नो शबाब नहीं होता