हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
एक दिन एक साल गुजरत बा
का पता बात ई उ समझत बा
छोड़ के चल गइल कहाँ जाने
अब करेजा में टीस टुभकत बा