Dr Damayanti Sharma 'Deepa' लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Dr Damayanti Sharma 'Deepa' लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

हिन्दी गजल - भीड़ दुखों की पल-पल भारी रहती है – डॉ. दमयन्ती शर्मा ‘दीपा’

 


 भीड़ दुखों की पल-पल भारी रहती है
जीवन है सो मारा-मारी रहती है
 
बोल पिता के काँटे जैसे हैं तो क्या
मन में तो सुरभित फुलवारी रहती है