Rekha Kinger 'Roshni' लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Rekha Kinger 'Roshni' लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

ग़ज़ल - शाम ए हिज्र, पुरवाई, और फिर ये तन्हाई - रेखा किंगर 'रौशनी'

 

शाम ए हिज्र,  पुरवाईऔर फिर ये तन्हाई 

जान ओ दिल पे बन आई और फिर ये तन्हाई

 

वक़्त ने ली अँगड़ाई, और फिर ये तन्हाई

हो न जाये रुस्वाई, और फिर ये तन्हाई