हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
“खाना लगा दूँ?” “हूँ...” “मूड तो अच्छा है?” “हाँ...” “स्मिता आजकल ज़िद नहीं करती।” “हूँ...”