हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
अपनी गुल्लक फोड़ के बैठी हुई है।
एक गहरी सोच में डूबी हुई है।
क्यों दिला पाई न बच्चे को खिलौना,
ख़ुद से मां इस बात पे रूठी हुई है।