हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
पर्णकुटी में तुम्हें न पाया जिस क्षण सीते!
उस क्षण से तुम्हीं को पाया कण कण में।
शब्दशः मन बसी छवि को उतार दिया
वन वासियों को दिये हुए विवरण में।