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संस्कृत गजल - वञ्चनारीतेःकृतं केन कदा सम्पादनम् – डॉ लक्ष्मीनारायण पाण्डेय

 

(संस्कृत गज्जलिका भावानुवाद सहिता)

 

वञ्चनारीतेःकृतं केन कदा सम्पादनम्

नीयते हृदयं समोदं दीयते सन्तापनम्

 

रीति यह किसने चलाई और कबसे बोल तो

मुस्कुराते दिल को लेकर भेंट करना पीर को

संस्कृत दोहे हिन्दी अर्थ सहित - डॉ. लक्ष्मीनारायण पाण्डेय


 

याति भीतिभयभीषणं वर्षं दर्पितमेव,

जनयेज्जनगणमङ्गलं ,नववर्षं हे देव !


 भीतिभूखभय से भरा रुग्ण गया चौबीस ।

जनगणमनमंगल करे,हे भगवन् पच्चीस ।