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हिन्दी गजल - न पौरुष और न ही पुरुषार्थ समझा – पूनम विश्वकर्मा

 

न पौरुष और न ही पुरुषार्थ समझा
परम् समझा न तू परमार्थ समझा
 
तुझे तो ज्ञान का अपने अहम है
कहाँ तू ज्ञान का भावार्थ समझा

अवधी निर्गुण - पूनम विश्वकर्मा

  

वन-वन भटकत प्रेम चिरइया

नहीं कटत वनवास रे,

पिय से मिलन की आस रे मोहे,

मोहे पिय से मिलन की आस रे।