हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
रूप जाड़ा के धूप जइसन बा,
तीर नैना ह तीखी चितवन बा।
वन-वन भटकत प्रेम चिरइया
नहीं कटत वनवास रे,
पिय से मिलन की आस रे मोहे,
मोहे पिय से मिलन की आस रे।
मेरी बे-लौस चाहत का भरम रख
कहीं दिल में मुझे भी तो सनम रख