हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
तपन पीता हूँ मैं सबकी अगन की
नई है रीत मेरी आचमन की
इक दिन तुम पर गीत लिखूंगा
तुमको मन का मीत लिखूंगा
सांसें बंसी की पुरवाई
तन में मुरकी की अंगड़ाई
पग-पग में ज्यों बजे पखावज
स्वर खां साहब की शहनाई
राग हैं कुछ गुनगुनाने शेष अब तक
कुछ प्रणय के गीत गाने शेष अब तक