लिखने बैठा समझ न आया
मैं क्या आज लिखूँ
पाँवों के मैं घाव लिखूँ ?
आँखों के ख़्वाब लिखूँ ?
मूल रूप से मथुरा वाले मगर हाल में इन्दौर निवासी श्री रवि खण्डेलवाल जी उन चुनिन्दा रचनाधर्मियों में शामिल हैं जिन्होंने पारिवारिक दायित्वों के निर्वहन के लिए अपने शौक़ को भले ही संदूकी में बंद कर दिया मगर अपने अन्दर के क्रिएटिव आदमी को मरने नहीं दिया.