हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
भाव प्रणय मन डूबता, कैसी जग की रीत।।
कैसी जग की, रीत विलग की, अजब बनाई।
मनवा तरसें, अँखियाँ बरसें, प्रीत लगाई।।
बैरी साजन, सूना सावन, अंतस क्रंदन।
मेल विरह के, भ्रमर उलझता, अनुपम बंधन।।