हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
खिड़की भर दुनिया
अस्पताल की खिड़की से
दुनिया कुछ अलग दिखती है—
यहाँ समय की चाल धीमी,
पर बाहर ज़िंदगी तेज़ भागती है।