हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
बैठक पौली बूढ़े स्याणे कम होगे
साँखी फ्हाली ज़कड़ी लाणे कम होगे
पहल्यां आली बात रही ना कोए बी
खंडका धोती दामण आणे कम होगे