कविता - हिसाब किताब में कच्ची महिलाएँ – अम्बिका झा
हिसाब किताब में
बहुत ही कच्ची होती हैं
महिलाएँ
तभी तो खर्च कर देती हैं
अपने सुकून के पल
खर्च कर देती हैं लड़कियाँ
बचपन
ताकि उसे भी वो स्नेह मिल
सके
जो भाइयों को मिलता आ रहा है
कविता - हिसाब किताब में कच्ची महिलाएँ – अम्बिका झा
हिसाब किताब में
बहुत ही कच्ची होती हैं
महिलाएँ
तभी तो खर्च कर देती हैं
अपने सुकून के पल
खर्च कर देती हैं लड़कियाँ
बचपन
ताकि उसे भी वो स्नेह मिल
सके
जो भाइयों को मिलता आ रहा है