Gopal Prasad Gop लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Gopal Prasad Gop लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सवैया छन्द - गोपाल प्रसाद गोप

 


कविता की निराली है जाति घनी कवि के अधरान हँसै कविता।

कविता जु उमंग रहै हित सौं प्रिय के हिय माँहिं बसै कविता।

कविता इक प्रेम कौ आश्रय है, बिरहीन के नैन खसै कविता।

कविता कहूँ मंचन पै ठुमकै जु अमीरन कैं बिलसै कविता।