हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
कविता की निराली है जाति घनी कवि के अधरान हँसै कविता।
कविता जु उमंग रहै हित सौं प्रिय के हिय माँहिं बसै कविता।
कविता इक प्रेम कौ आश्रय है, बिरहीन के नैन खसै कविता।
कविता कहूँ मंचन पै ठुमकै जु अमीरन कैं बिलसै कविता।