हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
संवेदनाओं के पोरों से
अंधेरे को पीछे धकेल
आँखें मलती किरणों को
अपने अन्तर्तम में सहेज
सुनहरा दिन
आसमान की साँकल खोल
धीरे-धीरे धरा पर
उतरता है, तो