हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
हँसी हँसारत करावा जनि तू, करै लगे बतकही जमाना
घरे के बतिया गईल जो बहरे बिछाये बइठल दरी जमाना
हे गणनायक, सिद्धिविनायक
हम पर कृपा करो
गजानन, मेरे विघ्न हरो